Chief Election Commissioner Powers : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी बहस के बीच चुनाव आयोग की व्यवस्था भी चर्चा में आ गई है। कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त को बाकी चुनाव आयुक्तों से ज्यादा वेतन और अधिकार मिलते हैं। जवाब है- नहीं। चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को समान वेतन और लगभग समान फैसले लेने का अधिकार मिलता है।
वेतन में कोई फर्क नहीं
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 के तहत तीनों आयुक्तों को सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर वेतन मिलता है। रिपोर्ट के मुताबिक तीनों का मूल वेतन 2.5 लाख रुपये प्रति माह है। इसके अलावा महंगाई भत्ता, सरकारी आवास, वाहन और दूसरी सरकारी सुविधाएं भी समान मिलती हैं। यानी सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त होने की वजह से किसी को ज्यादा सैलरी नहीं मिलती।
फैसला लेने में किसकी चलती है?
चुनाव आयोग आमतौर पर सामूहिक रूप से फैसले लेता है। मुख्य चुनाव आयुक्त आयोग की बैठकों की अध्यक्षता जरूर करते हैं, लेकिन वोटिंग के मामले में उनके पास अतिरिक्त अधिकार नहीं होता। अगर किसी मुद्दे पर मतभेद हो जाए तो बहुमत के आधार पर फैसला लिया जाता है। ऐसे में तीनों आयुक्तों का वोट बराबर माना जाता है।
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फिर मुख्य चुनाव आयुक्त अलग कैसे हैं?
मुख्य चुनाव आयुक्त और दूसरे चुनाव आयुक्तों के बीच सबसे बड़ा अंतर उन्हें हटाने की प्रक्रिया में है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए वही सख्त प्रक्रिया अपनाई जाती है जो सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने में होती है। यह एक लंबी और संवैधानिक प्रक्रिया है, इसलिए उन्हें विशेष सुरक्षा मिलती है।
दूसरे चुनाव आयुक्तों को कैसे हटाया जा सकता है?
किसी चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश जरूरी होती है। यही वजह है कि हटाने के नियमों में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच अंतर दिखाई देता है। हालांकि कामकाज और निर्णय लेने के दौरान सभी आयुक्त बराबर माने जाते हैं।
कैसे काम करता है चुनाव आयोग?
भारत का चुनाव आयोग 1950 से 1989 तक एक सदस्यीय संस्था था, जिसमें सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त होते थे। बाद में इसे तीन सदस्यीय बनाया गया। आज आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं। तीनों का कार्यकाल अधिकतम 6 साल या 65 वर्ष की आयु तक होता है, जो भी पहले हो। यही व्यवस्था देश में चुनाव प्रक्रिया को संचालित करती है और आयोग के सभी सदस्य मिलकर फैसले लेते हैं।