Gyanesh Kumar Supreme Court Case : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगले हफ्ते याचिका सुनने पर सहमति जताई है। यह याचिका चुनाव आयोग के काम करने के तरीके और फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाती है। मामले का जिक्र मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने किया गया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने अदालत के सामने इस मामले को रखा। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने याचिका को अगले हफ्ते सूचीबद्ध करने की बात कही।
याचिका में क्या सवाल उठाए गए हैं
यह याचिका राकेश कुमार सिंह की ओर से दाखिल की गई है। इसमें सवाल उठाया गया है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले ऐसे फैसले ले सकते हैं, जिनका अधिकार पूरे चुनाव आयोग के पास है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के कानून का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है और उसके फैसले आम तौर पर सर्वसम्मति से होने चाहिए। अगर सदस्यों के बीच मतभेद हो तो बहुमत के आधार पर फैसला लिया जा सकता है।
चुनाव आयोग के अंदर मतभेद का मामला
याचिका में चुनाव आयोग के दो सदस्यों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज कराई गई कथित आपत्तियों का भी जिक्र है। रिपोर्टों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कई मौकों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। इनमें मतदाता सूची से जुड़े काम और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं।
चुनाव आयोग ने क्या कहा
चुनाव आयोग ने इन आरोपों के बीच अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग का कहना है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। 26 सितंबर की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त भी शामिल हुए थे। बैठक के बाद आयोग ने कहा था कि एसआईआर से जुड़े फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने यह भी कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजी गई चिट्ठी किसी नीति या आईटी से जुड़े फैसले के बारे में नहीं थी।
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अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा
अगले हफ्ते होने वाली सुनवाई में मुख्य सवाल चुनाव आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका से जुड़े हो सकते हैं। याचिका में यह भी मांग की गई है कि अगर अदालत को लगे कि आयोग की तय प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो संबंधित फैसलों की कानूनी वैधता पर विचार किया जाए। हालांकि, अभी सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों पर कोई फैसला नहीं दिया है। अगले हफ्ते की सुनवाई में अदालत याचिका में उठाए गए सवालों पर आगे की प्रक्रिया तय करेगी।