
Election Commission News: बिहार एसआईआर और वोट चोरी के आरोपों पर सियासी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। अब इन सबका जवाब देने के लिए चुनाव आयोग ने रविवार को एक प्रेस कांन्फ्रेंस की। इस दौरान राहुल गांधी की ओर से लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दलों के विरोध के बीच अपना पक्ष रखा। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'चुनाव आयोग के लिए ना कोई पक्ष है और ना विपक्ष' SIR की शुरुआत बिहार से की गई है। चुनाव आयोग संवैधानिक कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा' मतदाता सूची का सत्यापन किया जा रहा है। सच को नजरअंदाज करते हुए भम्र फैलाने की कोशिश की गई है। वोट चोरी जैसे गलत शब्दों का प्रयोग ठीक नहीं। भारत के संविधान का अपमान किया जा रहा। बिना इजाजत मतदाता की तस्वीर इस्तेमाल की गई। सबूत मांगने पर कोई जवाब नहीं मिला। झूठे आरोपों से चुनाव आयोग नहीं डरता है।
#WATCH | Delhi: Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar says, "The machine-readable voter list is prohibited. This decision of the Election Commission is after the judgment of the Supreme Court and is from 2019."
— ANI (@ANI) August 17, 2025
"We have to understand the difference between a machine-readable… pic.twitter.com/qDO8acT4Fr
चुनाव आयोग के दरवाजे खुले
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति की जा रही है। चुनाव आयोग सभी मतदाताओं के साथ है। चुनाव आयोग के लिए सभी समकक्ष है। अगर कोई आपत्ति है तो 15 दिन में त्रुटि को जमा करें। आयोग निडर होकर सभी के साथ खड़ा है। 28,370 आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। चुनाव आयोग के दरवाजे खुले है। समय रहते त्रुटियों को बताएं। पारदर्शी प्रकिया में वोट चोरी संभव नहीं। त्रुटि सुधार के लिए SIR की प्रकिया जारी है।
जनता को गुमराह करने की कोशिश
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, वोट चोरी जैसे गलत शब्द का उपयोग करके जनता को गुमराह करने की कोशिश हो रही हे। ये भारत के संविधान का अपमान है. मशीन रिडेबल मतदाता सूची न साझा करने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मतदाता की निजता का उल्लंघन है. लेकिन फिर भी कुछ दलों की ओर से ये किया गया.
वोटरों ने 28 हजार दावे और आपत्तियां की
चीफ इलेक्शन कमिश्नर के अनुसार, सभी मतदाता और राजनीतिक दल ड्राफ्ट मतदाता सूची से त्रुटियों को हटाने में योगदान कर रहे हैं। वोटरों ने 28 हजार दावे और आपत्तियां की हैं. एक अगस्त से एक सितंबर का समय ड्राफ्ट सूची में दावे के साथ आपत्ति का समय है। अभी भी पंद्रह दिन का वक्त पाकी है। सभी राजनीतिक दल ड्राफ्ट मतदाता सूची की त्रुटि को फॉर्म के तहत जमा करें। चुनाव आयोग के दरवाजे सबके लिए समान रूप से खुले हैं। जमीन पर मतदाता, राजनीतक दल और BLOs मिलकर काम करने में जुटे हुए हैं। यह एक चिंता का विषय है। राजनीतिक दल के जिलाध्यक्ष और BLAs के सत्यापन या तो राष्ट्रीय दल तक पहुंच नहीं पा रहे हैं या भ्रम फैलान का प्रयास हो रहा है।