लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत को जाति, क्षेत्र और संकीर्ण स्वार्थों में बांटने वाली शक्तियों को सफल नहीं होने देना है। सामाजिक एकता के जरिए ही राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी। शिक्षक समाज की चेतना और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं। वे युवा पीढ़ी का सही मार्गदर्शन करें तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता।
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. बीआर अंबेडकर सभागार में रविवार को आयोजित प्रांतीय शिक्षक गौरव कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने कहा कि विचार कभी समाप्त नहीं होते। विचार आधारित संगठन लंबे समय तक प्रभावी रहते हैं। उन्होंने गीता प्रेस, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि तीनों के कार्यक्षेत्र अलग रहे, लेकिन समाज में जनचेतना जगाना और भारतीय संस्कृति से जोड़ना साझा उद्देश्य रहा।
योगी ने कहा कि संयुक्त परिवार पहले समाज की बड़ी ताकत थे। परिवारों के बिखराव के दौर में समाज को जोड़ने वाली संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। शिक्षकों को बच्चों में संस्कार, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने चाणक्य-चंद्रगुप्त, महर्षि वशिष्ठ-राम और सांदीपनि-कृष्ण की गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा ने दुनिया को दिशा दी है। शिक्षकों को युवाओं को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के साथ कर्तव्यबोध भी कराना होगा।
उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि 2017 से 2026 तक प्रदेश में 275 करोड़ पौधारोपण हुआ है। इस वर्ष भी 35 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने नदियों के संरक्षण को भावी पीढ़ियों के लिए जरूरी बताया।
योगी ने शिक्षकों से 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने और अधिकारों के साथ नागरिक कर्तव्यों का बोध कराने का आह्वान किया। कार्यशाला में डॉ. चिन्मय पंड्या, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।