Chikita Taniparthi Two Gold Medals : एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए दो स्वर्ण पदक जीतने वाली तीरंदाज चिकिता तनिपार्ती की सफलता के पीछे संघर्ष और पिता के त्याग की प्रेरक कहानी छिपी है। आर्थिक तंगी के बावजूद उनके पिता ने बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए बड़ा जोखिम उठाया। आज चिकिता की कामयाबी पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग पिता-बेटी की इस कहानी को सलाम कर रहे हैं।
किसान पिता ने बेटी के सपनों पर किया भरोसा
चिकिता एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता श्रीनिवास के पास करीब 3 एकड़ जमीन है। वह खुद खेलों में आगे नहीं बढ़ सके, लेकिन बेटी को खिलाड़ी बनाने का सपना देखते थे। कई खेलों पर विचार करने के बाद उन्होंने चिकिता को तीरंदाजी की ट्रेनिंग दिलाने का फैसला किया और एक अकादमी में दाखिला कराया।
धनुष खरीदने के लिए गिरवी रखी जमीन
शुरुआत में पिता ने कम कीमत वाले धनुष खरीदे, लेकिन आगे बढ़ने के लिए बेहतर उपकरण की जरूरत थी। जब 35 लाख रुपये कीमत वाले धनुष की आवश्यकता पड़ी तो उन्होंने अपनी जमीन गिरवी रखकर कर्ज लिया। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने बेटी के करियर को रुकने नहीं दिया और हर संभव मदद की।
खेत में काम करते हुए मिली जीत की खबर
चिकिता जब एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीत रही थीं, उस समय उनके पिता खेतों में काम कर रहे थे। घर में न टीवी था और न ही स्मार्टफोन। एक दोस्त ने फोन करके उन्हें बताया कि उनकी बेटी ने दो स्वर्ण पदक जीत लिए हैं। यह खबर सुनकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
एशियन गेम्स में रचा नया इतिहास
21 वर्षीय चिकिता तनिपार्ती ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। उन्होंने टीम स्पर्धा और मिश्रित टीम स्पर्धा दोनों में भारत को जीत दिलाई। उनके प्रदर्शन ने भारतीय तीरंदाजी को नई पहचान दिलाई है।
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संघर्ष और मेहनत की बनी मिसाल
चिकिता और उनके पिता की कहानी बताती है कि मजबूत इरादे और परिवार का साथ हो तो मुश्किल हालात भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। एक किसान पिता ने अपनी जमीन तक दांव पर लगा दी और बेटी ने अपने प्रदर्शन से उस भरोसे को सच साबित कर दिखाया। यही वजह है कि आज यह कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।