चीन ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के बाद राफेल जेट की बिक्री को कम करने के एक साजिश रचि थी। उसने एक फेक कैम्पेन चलाया था। इस कैम्पेन में चीन ने सोशल मीडिया पर फेक अकाउंट्स का उपयोग किया था। इसका उपयोग करके राफेल जेट के कथित मलबे की तस्वीर को फैलाया गया। ये वास्तव में एआई-जनरेटेड थीं।
भारत का क्या है लक्ष्य
चीन के फेक कैम्पेन के उद्देश्य था कि राफेल जेट की बिक्री पर ब्रेक लगाया जा सके। चीन ने अपने जेट जे-35 की बिक्री को बढ़ावा देना चाहता है। भारत और फ्रांस के बीच रिश्तों को खराब करना चाहता है।
चीन के फेक कैम्पेन क्या हुआ असर
इंडोनेशिया ने राफेल जेट की खरीद को रोक दिया। पाकिस्तान ने चीन से जे-35 जेट खरीदने का फैसला किया। वहीं भारत और चीन में तनाव बढ़ गया। यह फेक कैम्पेन अमेरिका की एक रिपोर्ट में उजारग हुआ है। इसमें कहा गया है कि चीन ने इस कैम्पेन को चलाने के लिए फेक सोशल मीडिया अकाउंट्स और एआई-जनरेटेड तस्वीरों का इस्तेमाल किया था। पाकिस्तान का दावा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसने भारत के 6 राफेल गिराए थे। मगर अमेरिकी संसद में पेश रिपोर्ट ने शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की कलई खुल गई। रिपोर्ट में चीन और पाकिस्तान ने 2024 और 2025 में सैन्य अभ्यास की बात सामने आई।
पहली बार उपयोग में चीनी हथियार
भारत और पाकिस्तान के बीच इस झड़प के दौरान पहली बार चीन के हथियारों का उपयोग किया गया था। इस दौरान एचक्यू-9 एयर डिफेंस सिस्टम, पीएल-15 एयर टू एयर मिसाइल और जे-10 फाइटर जेट का उपयोग किया। मगर सभी चीजे नाकारा साबित हुईं। पाकिस्तान में जब भारतीय वायुसेना ने हमला किया तब चीन की एयर डिफेंस प्रणाली पूरी तरह से फेल हो गई। पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम ब्रह्मोस मिसाइल और रफाल के हमलों को रोक नहीं पाया।