देश की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब चीन की सत्तारूढ़ पार्टी के कुछ नेता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पहुंचे। इस मुलाकात की खबर सामने आते ही विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। खासतौर पर समाजवादी पार्टी ने इसे विचारधारा से जुड़ा बड़ा विरोधाभास बताया और सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधा।
अखिलेश यादव का तीखा हमला
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सामाजिक माध्यम मंच पर लिखा कि जो लोग चीन से आयात का विरोध करते थे, वही आज चीन की पार्टी के नेताओं का स्वागत कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह स्थिति आम लोगों को भ्रमित करने वाली है।
बहिष्कार पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि अगर आज मुलाकात हो रही है तो इसकी तैयारी कई सालों से चल रही होगी। फिर सवाल उठता है कि चीनी सामान के बहिष्कार का अभियान क्यों चलाया गया। उन्होंने कहा कि क्या यह सब समर्थकों की आंखों में धूल झोंकने के लिए किया गया था, ताकि राजनीतिक फायदा लिया जा सके।
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समर्थकों की भावनाओं का जिक्र
सपा प्रमुख ने उन समर्थकों का भी जिक्र किया जो घर-घर जाकर चीनी सामान के बहिष्कार की अपील कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज वही समर्थक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लोग आपस में संदेश भेजकर कह रहे हैं कि हमने तो भरोसा किया था, लेकिन हमें ही धोखा दे दिया गया।
पंजीकरण को लेकर सवाल
अखिलेश यादव ने यह भी सवाल उठाया कि जिनसे मुलाकात की गई, उनका कागजों में कोई पंजीकरण नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का कोई आधिकारिक पता नहीं है, उनसे औपचारिक बातचीत पर भी सवाल खड़े होते हैं। यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं, बल्कि व्यवस्था और पारदर्शिता से भी जुड़ा है।
कहानी के उदाहरण से चेतावनी
अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने एक कहानी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे रंगे सियार की सच्चाई बारिश में सामने आ जाती है, वैसे ही राजनीति में भी सच ज्यादा दिन छिपा नहीं रहता। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात ने कई परतें खोल दी हैं और आने वाले समय में इसके राजनीतिक मायने और गहरे होंगे।