China US Treasury Holdings : अमेरिका से दूरी बनाने का संकेत दे रहा चीन पर्दे के पीछे अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में निवेश बनाए हुए है? चीन की अमेरिकी ट्रेजरी में हिस्सेदारी घट रही है, जबकि कनाडा, बेल्जियम और लक्जमबर्ग जैसे देशों की होल्डिंग बढ़ रही है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या चीन दूसरे देशों के जरिए अपना निवेश कर रहा है, ताकि अमेरिकी रिकॉर्ड में उसकी असली हिस्सेदारी कम दिखाई दे। हालांकि, ये आंकड़े अपने आप में चीन की किसी गुप्त रणनीति को साबित नहीं करते।
अमेरिकी बॉन्ड से चीन की हिस्सेदारी घटी
अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक मुकाबला लंबे समय से जारी है। चीन डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपनी मुद्रा युआन की भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी में चीन की दर्ज हिस्सेदारी में गिरावट आई है। दी गई जानकारी के मुताबिक, अगस्त में चीन की होल्डिंग 27 अरब डॉलर घटकर 591 अरब डॉलर रह गई। यह अगस्त 2008 के बाद का सबसे निचला स्तर बताया गया है। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी के आंकड़ों में दर्ज हिस्सेदारी और चीन के कुल वास्तविक निवेश के बीच अंतर हो सकता है। इसलिए केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि चीन ने अमेरिकी बॉन्ड से पूरी तरह दूरी बना ली है।
कनाडा की होल्डिंग बढ़ने से उठे सवाल
चीन की हिस्सेदारी घटने के साथ कनाडा के अमेरिकी ट्रेजरी निवेश में बढ़ोतरी ने भी ध्यान खींचा है। दी गई जानकारी के अनुसार, अगस्त में कनाडा की होल्डिंग 38 अरब डॉलर बढ़कर 465 अरब डॉलर तक पहुंच गई। वर्ष 2019 की शुरुआत से कनाडा की दर्ज हिस्सेदारी में करीब 369 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। इसी अवधि में चीन की होल्डिंग लगभग 534 अरब डॉलर घटी है। इन बदलावों ने बाजार के जानकारों के बीच चर्चा बढ़ाई है कि क्या कुछ निवेश दूसरे देशों के वित्तीय खातों के जरिए रखा जा रहा है। हालांकि, कनाडा की होल्डिंग बढ़ना अकेले इस बात का सबूत नहीं है कि वह चीन के लिए निवेश कर रहा है।
फॉरेन कस्टोडियन के जरिए निवेश का शक
इस पूरे मामले में फॉरेन कस्टोडियन की भूमिका अहम मानी जा रही है। कस्टोडियन ऐसी वित्तीय संस्था होती है जो निवेशकों की ओर से शेयर, बॉन्ड और दूसरी संपत्तियों को सुरक्षित रखती है। अगर कोई देश अपनी अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज किसी दूसरे देश में स्थित वित्तीय संस्था के खाते के जरिए रखता है, तो सार्वजनिक आंकड़ों में उस निवेश की पहचान सीधे उस देश के नाम से नहीं हो सकती। इसी वजह से कुछ जानकारों का मानना है कि चीन की वास्तविक हिस्सेदारी आधिकारिक आंकड़ों में दर्ज रकम से अधिक हो सकती है। लेकिन यह संभावना है, पुष्टि हुआ तथ्य नहीं।
बेल्जियम और लक्जमबर्ग के आंकड़े भी चर्चा में
बेल्जियम और लक्जमबर्ग की अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग में बढ़ोतरी को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। दी गई जानकारी के मुताबिक, अगस्त में बेल्जियम की दर्ज होल्डिंग 20 अरब डॉलर और लक्जमबर्ग की 6 अरब डॉलर बढ़ी। दोनों देशों में वित्तीय सेवाओं और निवेश की देखरेख करने वाली संस्थाओं की मौजूदगी के कारण उनके आंकड़ों पर ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, इन देशों के जरिए रखे गए सभी अमेरिकी बॉन्ड को चीन का निवेश मानना सही नहीं होगा। इन आंकड़ों में कई अलग-अलग निवेशकों की संपत्तियां शामिल हो सकती हैं। चीन की हिस्सेदारी छिपाने का दावा साबित करने के लिए अतिरिक्त जानकारी की जरूरत होगी।
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क्या चीन डॉलर से दूरी बना रहा है?
चीन लंबे समय से विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी में उसकी दर्ज हिस्सेदारी में गिरावट इस व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकती है। लेकिन अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में निवेश कम होना और दूसरे देशों के जरिए निवेश जारी रखना दो अलग बातें हैं। यह पता लगाने के लिए कि चीन वास्तव में कितनी अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज रखता है, केवल देशवार आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं। निवेश के स्वामित्व और उसे रखने वाली वित्तीय संस्थाओं की जानकारी भी जरूरी है।
अमेरिका-चीन की आर्थिक टक्कर में क्यों अहम है मामला?
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश दुनिया की वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चीन की हिस्सेदारी में गिरावट डॉलर और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर उसकी रणनीति पर सवाल खड़े करती है। वहीं, दूसरे देशों की होल्डिंग बढ़ने से निवेश के वास्तविक मालिक को लेकर चर्चा होती है। अगर चीन कस्टोडियन के जरिए अपनी संपत्तियां रख रहा है, तो उसकी वास्तविक हिस्सेदारी सार्वजनिक आंकड़ों से अलग हो सकती है। लेकिन उपलब्ध जानकारी से अभी यह साबित नहीं होता कि कनाडा, बेल्जियम या लक्जमबर्ग चीन की ओर से निवेश कर रहे हैं। फिलहाल यह मामला अमेरिकी ट्रेजरी के आंकड़ों और चीन की वित्तीय रणनीति को समझने के लिहाज से अहम है।