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China Yuleen Festival : दुनियाभर में जहां कुत्तों को इंसान का सबसे अच्छा दोस्त माना जाता है, वहीं चीन के ग्वांग्शी प्रांत के यूलिन शहर में हर साल एक ऐसा त्योहार मनाया जाता है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद और आलोचना का कारण बनता है. इसे "यूलिन डॉग मीट फेस्टिवल" कहा जाता है, जिसमें हजारों कुत्तों को मारकर उनका मांस खाया जाता है. यह उत्सव हर साल जून के महीने में आयोजित होता है और इसकी शुरुआत 2009 में हुई थी. इस त्योहार को लेकर चीन समेत पूरी दुनिया में कई पशु अधिकार संगठनों, सोशल एक्टिविस्ट्स और आम लोगों ने समय-समय पर विरोध दर्ज कराया है.
त्योहार का इतिहास और उद्देश्य
यूलिन डॉग फेस्टिवल की शुरुआत कथित रूप से स्थानीय व्यापारियों ने की थी ताकि गर्मियों में डॉग मीट बेचकर मुनाफा कमाया जा सके. चीन के कुछ हिस्सों में यह मान्यता है कि कुत्ते का मांस खाने से गर्मी में शरीर ठंडा रहता है और यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। हालांकि यह बात वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है. इस त्योहार के दौरान हजारों कुत्तों को तंग पिंजरों में बंद करके बाजारों में लाया जाता है, कई बार तो चोरी या बेसहारा पालतू कुत्तों को भी पकड़कर इस व्यापार का हिस्सा बना दिया जाता है. इन्हें अमानवीय तरीके से मारा जाता है, जिससे इनकी पीड़ा और भी अधिक हो जाती है.
क्या होता है इस त्योहार में?
यूलिन फेस्टिवल करीब 10 दिनों तक चलता है, जिसमें स्थानीय लोग कुत्तों का मांस पकाकर खाते हैं। बाजारों में खुलेआम कुत्तों को काटा जाता है और रेस्टोरेंट्स में इसे पारंपरिक व्यंजन के तौर पर परोसा जाता है। कई बार कुत्तों को मारने से पहले पीटा जाता है, जिससे उनका मांस ‘नरम’ हो जाए — यह एक क्रूर और अमानवीय सोच है, जिसकी विश्वभर में निंदा होती है.
विवाद और विरोध
इस त्योहार को लेकर हर साल तीव्र विरोध देखने को मिलता है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे PETA, Humane Society और Animal Equality ने इस प्रथा को खत्म करने की मांग की है. चीन के कई नागरिक भी अब इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, खासकर युवा पीढ़ी, जो अब कुत्तों को पालतू और परिवार का हिस्सा मानती है. हालांकि चीन सरकार ने आधिकारिक रूप से इसे मान्यता नहीं दी है, फिर भी यह स्थानीय स्तर पर आयोजित होता है और कई बार प्रशासन इसे नजरअंदाज कर देता है. 2020 में चीन ने कुत्तों को "लाइवस्टॉक" की कैटेगरी से हटा दिया था, जिससे उम्मीद जगी थी कि यह त्योहार बंद हो सकता है, लेकिन अब भी यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. यूलिन डॉग मीट फेस्टिवल न केवल एक अमानवीय परंपरा है, बल्कि यह पशु अधिकारों के खिलाफ भी है। आधुनिक समाज में जहां जानवरों के प्रति दया और सम्मान की बात की जाती है, ऐसे त्योहार मानवता पर सवाल खड़े करते हैं। जरूरी है कि जागरूकता फैलाई जाए, स्थानीय सरकार पर दबाव बनाया जाए और इस क्रूर परंपरा को रोका जाए. क्योंकि त्योहार वही अच्छे होते हैं, जो जीवन को सम्मान दें, न कि उसे छीनें.