चीनी मांझे से हो रही लगातार मौतों पर हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अब ऐसे मामलों को सामान्य दुर्घटना नहीं माना जाएगा। यदि चीनी मांझे की वजह से किसी व्यक्ति की जान जाती है तो दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होगा। खास बात यह है कि नाबालिग द्वारा मांझा उड़ाने की स्थिति में उसके माता-पिता को भी जेल जाना पड़ सकता है।
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश
चीनी मांझे से हो रही जानलेवा घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद बाजारों में चीनी मांझे की उपलब्धता प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाती है। कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस को आदेश दिया है कि बैन को सिर्फ कागजों में नहीं बल्कि जमीन पर सख्ती से लागू किया जाए।
गैर-इरादतन हत्या का केस होगा दर्ज
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति की मौत चाइनीज पतंग की डोर से होती है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा। इसका मतलब है कि आरोपी को यह कहकर राहत नहीं मिलेगी कि घटना दुर्घटनावश हुई थी।
नाबालिग उड़ाएगा मांझा, जिम्मेदार होंगे माता-पिता
कोर्ट ने इस मामले में अभिभावकों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है। यदि कोई नाबालिग बच्चा चीनी मांझा उड़ाते हुए पकड़ा जाता है या उसकी वजह से किसी को नुकसान होता है, तो उसके माता-पिता या अभिभावकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अदालत का मानना है कि बच्चों की गतिविधियों पर निगरानी रखना माता-पिता का दायित्व है।
बिक्री और भंडारण पर भी सख्ती
हाईकोर्ट ने केवल पतंग उड़ाने वालों पर ही नहीं, बल्कि चीनी मांझा बेचने, भंडारण करने और सप्लाई करने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि लालच में जानलेवा मांझे का व्यापार करना गंभीर अपराध है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इंसानों और पक्षियों दोनों के लिए खतरा
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि चीनी मांझा न सिर्फ इंसानों के लिए बल्कि पक्षियों के लिए भी बेहद घातक है। कई मामलों में पक्षियों की गर्दन कटने और गंभीर रूप से घायल होने की घटनाएं सामने आई हैं। कोर्ट ने इसे समाज के प्रति गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताया और प्रशासन को सख्त निगरानी के आदेश दिए।