मुंबई के बल्लेबाज चिन्मय सुथार ने रणजी ट्रॉफी में 400 रन की नाबाद पारी खेलकर इतिहास रच दिया है। कभी मुंबई की टीम में नियमित मौका मिलने का इंतजार कर रहे चिन्मय ने आखिरकार मिजोरम की ओर से खेलने का फैसला किया। उनका यह फैसला करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ। नागालैंड के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबले में उन्होंने 400 रन बनाकर क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 29 साल के चिन्मय मुंबई के घरेलू क्रिकेट से जुड़े रहे हैं, लेकिन लाल गेंद के क्रिकेट में उन्हें पर्याप्त मौके नहीं मिल रहे थे। ऐसे में उन्होंने नई टीम के साथ अपना हुनर दिखाने का रास्ता चुना।
517 गेंदों पर बनाए नाबाद 400 रन
नागालैंड के खिलाफ चिन्मय ने 517 गेंदों का सामना करते हुए 46 चौके और 7 छक्के लगाए। उनकी लंबी पारी की बदौलत मिजोरम ने पहली पारी में 9 विकेट पर 581 रन बनाकर पारी घोषित की। चिन्मय ने शुरुआत से ही संभलकर बल्लेबाजी की और विकेट पर टिके रहे। उन्होंने जल्दबाजी करने के बजाय टीम के स्कोर को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया। इस पारी के साथ वह रणजी ट्रॉफी में एक पारी में 400 रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए। उनकी इस उपलब्धि ने घरेलू क्रिकेट में उनके नाम को खास पहचान दिलाई।
मिजोरम के लिए पहले मैच में बनाए थे 99 रन
मिजोरम की ओर से रणजी ट्रॉफी में खेलने का फैसला चिन्मय के लिए फायदेमंद साबित हुआ। अपने पहले मुकाबले में उन्होंने मणिपुर के खिलाफ दूसरी पारी में 99 रन बनाए थे। वह शतक से केवल एक रन दूर रह गए थे। इसके बाद नागालैंड के खिलाफ उन्होंने 400 रन की ऐतिहासिक पारी खेल दी। रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई की व्हाइट-बॉल टीम में खेलने के बावजूद उन्हें रणजी क्रिकेट में नियमित अवसर नहीं मिल रहे थे। वह लंबे प्रारूप में अपनी पहचान बनाना चाहते थे। मिजोरम से खेलने का मौका मिलने पर उन्होंने इसे स्वीकार किया और अपनी बल्लेबाजी से खुद को साबित कर दिया।
आखिरी विकेट के लिए हुई बड़ी साझेदारी
चिन्मय की पारी में आखिरी विकेट के लिए हुई साझेदारी ने भी अहम भूमिका निभाई। जब वह 231 रन पर थे, तब मिजोरम का एक विकेट बाकी था। इसके बाद नंबर-11 के बल्लेबाज लालरेम्पुइया छकछुआक उनके साथ क्रीज पर उतरे। दोनों ने दसवें विकेट के लिए नाबाद 189 रन जोड़े। इस साझेदारी में चिन्मय ने 169 रन बनाए। उन्होंने बताया कि दोनों बल्लेबाजों का ध्यान टीम के लिए ज्यादा से ज्यादा रन जोड़ने पर था। इसी साझेदारी ने मिजोरम को 581 रन तक पहुंचाने में मदद की।
रणजी ट्रॉफी में दूसरे नंबर पर पहुंचे
रणजी ट्रॉफी में एक पारी में 400 रन बनाने का कारनामा इससे पहले बीबी निंबालकर ने किया था। उन्होंने 1948-49 के सीजन में महाराष्ट्र की ओर से खेलते हुए काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे। इस तरह रणजी ट्रॉफी में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का रिकॉर्ड अब भी निंबालकर के नाम है। चिन्मय ने अपनी 400 रन की पारी के दौरान पृथ्वी शॉ के 379 रन के स्कोर को भी पीछे छोड़ दिया। उनकी उपलब्धि घरेलू क्रिकेट में एक बड़ी व्यक्तिगत पारी के रूप में दर्ज हो गई है।
टी20 में भी दिखा चुके हैं दम
चिन्मय सुथार ने छोटे प्रारूप में भी अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया है। वह मुंबई टी20 लीग में मराठा रॉयल्स के लिए खेलते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 2025 के सीजन में ऑरेंज कैप जीती थी और 2026 में भी सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में शामिल रहे। उनके पिता राजेश सुथार भी मुंबई के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेल चुके हैं। चिन्मय ने ऐतिहासिक पारी के बाद सबसे पहले अपने पिता को फोन किया। उनके पिता शुरुआती दिनों से उनका हौसला बढ़ाते रहे हैं। अब 400 रन की पारी के बाद चिन्मय ने घरेलू क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना ली है।