
Chirag Paswan: बिहार की राजनीति में एक बार फिर पासवान परिवार चर्चा में है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान अपने पिता और दिग्गज नेता रामविलास पासवान की तरह ‘किंगमेकर’ बनने की राह पर नजर आ रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनावों में एनडीए के लिए उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। चिराग सीट बंटवारे में अपनी शर्तों पर अडिग हैं और यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि बिहार की सत्ता की चाबी इस बार उनके हाथ में हो सकती है। उनके तेवर और रणनीति ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।
पिता रामविलास की तरह सियासी चालें
2005 में जब बिहार में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, तब रामविलास पासवान ने लालू प्रसाद यादव को समर्थन देने से इनकार कर राजनीतिक समीकरण पलट दिए थे। उन्होंने मुस्लिम मुख्यमंत्री की शर्त रखकर आरजेडी को चित कर दिया था। नतीजतन, चुनाव दोबारा हुए और एनडीए की सत्ता आई। इस एक चाल से लालू का 15 साल पुराना शासन खत्म हो गया था। चिराग आज उसी तर्ज पर बिहार की सियासत में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश में हैं।
चिराग का नया सियासी समीकरण
पिता के निधन के बाद चिराग ने पार्टी को दोबारा खड़ा किया और 2024 के लोकसभा चुनाव में पांचों सीटें जीतकर अपनी ताकत साबित की। अब 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले वे एनडीए के साथ मिलकर लड़ने की तैयारी में हैं, लेकिन सीटों पर रस्साकशी जारी है। चिराग करीब 40 सीटों की मांग कर रहे हैं, जबकि बीजेपी 25 पर अड़ी है। चिराग का कहना है कि उनकी प्राथमिकता “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर समीकरण सही बैठे तो चिराग पासवान इस बार भी बिहार की सत्ता के असली ‘किंगमेकर’ साबित हो सकते हैं।