
दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी या रूप चौदस भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसे यमराज, भगवान कृष्ण और देवी काली से जुड़े विभिन्न पौराणिक प्रसंगों से जोड़ा जाता है। वर्ष 2025 में छोटी दिवाली 20 अक्टूबर (सोमवार) को मनाई जाएगी। यह दिन आध्यात्मिक रूप से शुद्धि, रूप-सौंदर्य और नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।
नरकासुर वध और छोटी दिवाली का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ मिलकर राक्षस नरकासुर का वध किया था, जिसने 16,000 कन्याओं को बंदी बना रखा था। उसके वध के बाद, श्रीकृष्ण ने उन कन्याओं की प्रतिष्ठा बचाने के लिए उनसे विवाह किया। इस विजय की खुशी में पूरे द्वारका में दीप जलाए गए थे, और तभी से यह परंपरा 'छोटी दिवाली' के रूप में हर साल मनाई जाती है। वहीं दक्षिण भारत में इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में अधिक प्रमुखता दी जाती है।
पूजा विधि और परंपराएं
छोटी दिवाली के दिन प्रातः काल सूर्योदय से पहले स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस स्नान को "अभ्यंग स्नान" कहा जाता है, जिसमें उबटन लगाकर शरीर की शुद्धि की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन तिल का तेल लगाकर स्नान करने से नरक जाने का भय समाप्त होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। घर में दीपक जलाकर, यमराज के नाम से दीप दान किया जाता है जिससे अकाल मृत्यु का दोष दूर होता है। महिलाएं इस दिन रूप सौंदर्य के लिए विशेष पूजा करती हैं, जिसे रूप चौदस भी कहा जाता है।
बुराई पर विजय
छोटी दिवाली न केवल दीपों के त्योहार की शुरुआत है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, आंतरिक प्रकाश और बुराई पर विजय का संदेश भी देती है। वर्ष 2025 में 20 अक्टूबर को मनाई जाने वाली यह पर्वधर्मिता नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और दिवाली की मुख्य रात के स्वागत के लिए मन, शरीर और घर को तैयार करने का पावन अवसर है। दीप जलाएं, नकारात्मकता मिटाएं और इस दिन को आत्मिक रूप से जागरूक होकर मनाएं।