Choti Diwali 2026: दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव में नरक चतुर्दशी का अपना अलग महत्व है। इसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घरों में दीप जलाने के साथ यमराज की पूजा और दीपदान करने की परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि यमदेव के लिए दीपक अर्पित करने से परिवार पर आने वाला अकाल मृत्यु का संकट टलता है। छोटी दिवाली पर सुबह अभ्यंग स्नान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इस स्नान को पुण्यदायी बताया गया है। वहीं, शाम के समय दीपों से घर को रोशन किया जाता है। आइए जानते हैं कि 2026 में नरक चतुर्दशी पर दीप जलाने का शुभ मुहूर्त कब है और इस दिन कितने दीपक जलाना अच्छा माना जाता है।
छोटी दिवाली 2026: दीप जलाने का शुभ समय
इस साल 7 नवंबर 2026 को छोटी दिवाली मनाई जाएगी। इस दिन संध्या के समय दीपदान का विशेष महत्व है। दीपक जलाने के लिए शुभ अवधि शाम 5 बजकर 32 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 9 मिनट तक बताई गई है। इस दौरान श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के बाद घर के विभिन्न हिस्सों में दीपक रख सकते हैं।
नरक चतुर्दशी पर कितने दीयों से करें रोशनी?
छोटी दिवाली पर दीपकों की संख्या को लेकर धार्मिक परंपराओं में 14 का विशेष उल्लेख मिलता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन घर में कम से कम 14 दीपक जरूर जलाने चाहिए। इनके साथ यमराज के निमित्त एक अलग दीपक भी अर्पित किया जाता है। इसे यम दीपक कहा जाता है। मान्यता है कि इस तरह दीपदान करने से यमदेव प्रसन्न होते हैं और परिवार के लोगों की रक्षा करते हैं।
घर की इन जगहों पर जरूर रखें दीपक
नरक चतुर्दशी पर दीप जलाने का उद्देश्य सिर्फ घर को सजाना नहीं, बल्कि धार्मिक रूप से भी इस दिन को खास बनाना है। इसलिए परंपरा के अनुसार घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक रखे जाते हैं। इनमें प्रमुख स्थान हैं:
.घर का प्रवेश द्वार
.पूजा स्थल और मंदिर
.दक्षिण दिशा
.रसोईघर
.घर का आंगन
.तुलसी का पौधा
.मकान की छत
.दरवाजे और खिड़कियों के आसपास
.बच्चों का पढ़ाई वाला कमरा
.दुकान और दफ्तर
.घर के बाहर का हिस्सा
.पवित्र पेड़ों के आसपास
.कुएं या अन्य जल स्रोत के पास
.अनाज रखने का स्थान
दीपदान करते समय इन बातों को न करें नजरअंदाज
मिट्टी के दीयों को दें प्राथमिकता: छोटी दिवाली पर दीपदान के लिए पारंपरिक मिट्टी के दीपक इस्तेमाल करने की मान्यता है। इन्हें साफ करके पूजा के लिए तैयार रखें।शाम के शुभ समय में जलाएं दीप: दीपदान के लिए प्रदोष काल को महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए संध्या के समय पूजा करने के बाद घर में दीपक प्रज्वलित करें। यमदेव के लिए अलग दीपक रखें: इस दिन यमराज के नाम से दीप जलाने की परंपरा है। इसे घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। कई परिवारों में यह दीपक घर के बाहर नाली के समीप रखने की भी परंपरा है।
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धार्मिक विश्वास के मुताबिक, नरक चतुर्दशी पर विधिपूर्वक दीपदान करने से घर में शुभता आती है। इसी भावना के साथ लोग छोटी दिवाली पर दीप जलाकर अपने परिवार की खुशहाली और मंगल की कामना करते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।