सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर चल रही सुनवाई के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई गई। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि मेनका गांधी ने अदालत के आदेशों की आलोचना करके अवमानना की है। इस पर न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, "अजमल कसाब ने अदालत की अवमानना नहीं की, लेकिन आपकी मुवक्किल (मेनका गांधी) ने की है"।
अदालत के आदेशों की आलोचना की
मेनका गांधी ने अपने पॉडकास्ट में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर अदालत के आदेशों की आलोचना की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया था। अदालत ने कहा कि मेनका गांधी की टिप्पणियां अवमानना के समान हैं, लेकिन अदालत ने उनकी माफी को स्वीकार करते हुए अवमानना की कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया।
टीकाकरण और कीटमुक्त किया जाना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर कई महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि आवारा कुत्तों को पकड़कर उन्हें उनके मूल स्थान पर वापस छोड़ दिया जाए, लेकिन पहले उन्हें नसबंदी, टीकाकरण और कीटमुक्त किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जिन कुत्तों में रेबीज या आक्रामकता के लक्षण हैं, उन्हें अलग रखा जाना चाहिए और उन्हें वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए
इसके अलावा, कोर्ट ने आदेश दिया है कि आवारा कुत्तों को स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से हटाया जाए और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए। कोर्ट ने यह भी कहा है कि इन स्थानों पर कुत्तों को न आने देने के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।