
CJI Gavai: खजुराहो के जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की मरम्मत संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर विवाद का कारण बन गई। उनकी टिप्पणी वायरल होते ही आलोचना शुरू हो गई, यहां तक कि विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी उन पर वाणी में संयम रखने की नसीहत दी। अब इस पूरे मामले पर खुद चीफ जस्टिस बीआर गवई सामने आए और सफाई देते हुए कहा कि उनकी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा, "मुझे अगले दिन किसी ने बताया कि मेरी टिप्पणी सोशल मीडिया पर चलाई जा रही है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं और कभी किसी की आस्था को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था।"
सॉलिसिटर जनरल और कपिल सिब्बल का समर्थन
सुनवाई के दौरान मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह पिछले 10 सालों से चीफ जस्टिस गवई को जानते हैं और वह हमेशा हर धर्मस्थल पर जाते हैं तथा सभी का आदर करते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर हो रही प्रतिक्रियाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आजकल हर छोटे-से-छोटे एक्शन पर गलत रिएक्शन सामने आ जाता है। वहीं वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी कहा कि इस तरह की परिस्थितियां रोज देखने को मिलती हैं, लेकिन इससे किसी की छवि खराब करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
VHP ने दी संयम की नसीहत
विवाद बढ़ने पर विश्व हिंदू परिषद ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखते हुए कहा कि न्यायालय न्याय का मंदिर है और इसमें जनता की गहरी आस्था है। इसलिए जरूरी है कि न्यायाधीश भी अपनी वाणी में संयम रखें। उन्होंने कहा कि जजों की टिप्पणियों से समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए और भविष्य में ऐसी टिप्पणियों से परहेज करना ही बेहतर होगा।