CJI Surya Kant Said Disputes: दिल्ली में आयोजित BRICS चीफ जस्टिस फोरम के दूसरे दिन शनिवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में मध्यस्थता की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के दौर में न्याय व्यवस्था का समय पर और अनुमानित तरीके से काम करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कानून और न्याय का उद्देश्य ऐसे समाधान तलाशना होना चाहिए, जो समाज और मानवता के व्यापक हित में हों।
बातचीत से विवाद सुलझाने पर जोर
CJI सूर्यकांत ने कहा कि BRICS देशों की अलग-अलग परंपराओं में बातचीत और आपसी सहमति के जरिए विवाद सुलझाने की पुरानी व्यवस्था रही है। भारत में पंचायतों के माध्यम से स्थानीय विवादों के समाधान की परंपरा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि चीन समेत अन्य BRICS देशों में भी संवाद और समझौते को महत्व दिया गया है। उनके मुताबिक, मध्यस्थता इसी साझा सोच पर आधारित एक व्यावहारिक तरीका है, जिसमें पक्ष अपने रिश्ते बनाए रखते हुए विवाद का समाधान खोज सकते हैं।
व्यापारिक विवादों में मध्यस्थता उपयोगी
CJI ने कहा कि वैश्विक स्तर पर व्यापार बढ़ने के साथ देशों और कंपनियों के बीच व्यावसायिक विवाद भी सामने आते हैं। ऐसे मामलों में मध्यस्थता विवाद को लंबा खींचने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान तक पहुंचने का रास्ता देती है। उन्होंने BRICS देशों से अपने कानूनी और मध्यस्थता संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे मध्यस्थों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जो व्यापार के साथ-साथ अलग-अलग देशों की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को भी समझते हों।
न्यायपालिका से भरोसा बढ़ाने की अपील
CJI सूर्यकांत ने कहा कि मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की भूमिका केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे विवाद समाधान की प्रक्रियाओं में लोगों का भरोसा मजबूत करने में भी योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता को मजबूत करने से बातचीत को बढ़ावा मिलेगा, व्यापारिक गतिविधियां जारी रहेंगी और BRICS सदस्य तथा सहयोगी देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ेगा। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
नालंदा विश्वविद्यालय का दिया उदाहरण
फोरम में CJI ने स्वस्थ असहमति और विचार-विमर्श की संस्कृति को भी जरूरी बताया। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राचीन भारत का यह शिक्षा केंद्र दुनिया भर के विद्यार्थियों और विद्वानों के लिए खुला था। वहां अलग-अलग विचारों को जगह दी जाती थी और किसी एक विचारधारा से सहमत होना अनिवार्य नहीं था। CJI ने कहा कि BRICS को भी एक ऐसे जीवंत मंच के रूप में विकसित होना चाहिए, जहां अलग-अलग विचारों का सम्मान हो, खुलकर चर्चा हो और असहमति के बावजूद साझा समाधान तलाशे जाएं।