CJI takes a tough stand: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान तीखी प्रतिक्रिया देते हुए न्यायपालिका में हस्तक्षेप की कोशिशों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अदालत के कामकाज में किसी भी तरह की बाहरी दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भाई को फोन करने पर भड़के CJI
सुनवाई के दौरान CJI ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके भाई को फोन कर अदालत के आदेश पर सवाल उठाना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की हरकत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है और उसे बख्शा नहीं जाएगा।
23 साल के अनुभव का दिया हवाला
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वे लंबे समय से ऐसे मामलों से निपटते आ रहे हैं और उन्हें पता है कि ऐसे लोगों से कैसे सख्ती से पेश आना है। उन्होंने साफ कहा कि चाहे कोई व्यक्ति देश के बाहर भी क्यों न चला जाए, कानून से बच नहीं सकता।
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दुरुपयोग का मामला
यह मामला दो छात्रों से जुड़ा था, जिन्होंने Haryana से अल्पसंख्यक कोटे के तहत मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए धर्म परिवर्तन का दावा किया था। कोर्ट को संदेह हुआ कि यह कदम केवल आरक्षण का लाभ उठाने के लिए उठाया गया है।
कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी
अदालत ने इसे धोखाधड़ी की कोशिश मानते हुए याचिका खारिज कर दी और अधिकारियों को ऐसे मामलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश बनाने को कहा। CJI ने टिप्पणी की कि इस तरह की कोशिशें असली जरूरतमंदों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाती हैं।