कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को मिले कथित 1 करोड़ रुपये के फंड को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सूरत के RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने इस मामले में चुनाव आयोग (ECI), CBIC और महाराष्ट्र सरकार के पास शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की है। उन्होंने CJP के कानूनी दर्जे, फंडिंग और संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं।
CJP फंडिंग और कानूनी स्थिति पर उठाए सवाल
सूरत के RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके परिवार से जुड़े आर्थिक मामलों की जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके की आय सीमित थी, तो परिवार ने विदेश में बच्चों की पढ़ाई का खर्च किस तरह उठाया। इसी आधार पर उन्होंने आर्थिक स्थिति और संपत्तियों की जांच की मांग की है।
तीन अलग-अलग संस्थाओं में दर्ज कराई शिकायत
अमित तिवारी के अनुसार उन्होंने इस मामले को लेकर तीन जगह शिकायत दर्ज कराई है। चुनाव आयोग में CJP के संगठनात्मक और कानूनी दर्जे को लेकर शिकायत की गई है। वहीं कपिल सिब्बल द्वारा दिए गए 1 करोड़ रुपये के फंड को लेकर उन्होंने CBIC से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इस राशि पर टैक्स नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार से भी परिवार की आर्थिक संपत्तियों की जांच की मांग की गई है।
CJP के पंजीकरण को लेकर भी सवाल
RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने आरोप लगाया कि CJP राजनीतिक दल की तरह काम कर रहा है और लोगों से चंदा भी प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कोई संगठन राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होकर फंड प्राप्त करता है तो उसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत चुनाव आयोग में पंजीकरण कराना जरूरी होता है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
आंदोलन के मुद्दों को लेकर भी जताई आपत्ति
अमित तिवारी ने CJP के नेतृत्व में चलाए गए आंदोलन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शुरुआत में आंदोलन का उद्देश्य NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाना था, लेकिन बाद में इसका रुख बदल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान कुछ ऐसे बयान दिए गए, जिनको लेकर उन्होंने संबंधित संस्थाओं में शिकायत दर्ज कराई है।
जांच की मांग, तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की अपील
अमित तिवारी ने कहा कि उनकी शिकायतों का उद्देश्य केवल तथ्यों की जांच कराना है। उन्होंने संबंधित एजेंसियों से अपील की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल इस मामले में शिकायतों के बाद आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।