ELECTION COMMISSION ROW: दिल्ली में गुरुवार को Cockroach Janta Party (CJP) ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर तीन बड़ी मांगें सामने रखीं। इनमें ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग से लेकर आगामी चुनावों को फिलहाल रोकने, SIR को फ्रीज करने और जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट बहाल करने की मांग शामिल है। पार्टी ने SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में बदलाव की भी मांग रखी है।
पहली मांग- ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और कार्रवाई
सौरव दास ने पहली मांग के तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रखी। इसके साथ ही उन्होंने उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने और यह पता लगाने की मांग की कि कथित तौर पर उन्हें आदेश किसकी ओर से मिले थे। CJP ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों का हवाला देते हुए कहा कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के भीतर पद से इस्तीफा देने की मांग रखी है और ऐसा नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
दूसरी मांग- चुनाव रोकने और जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट बहाल करने की मांग
CJP की दूसरी बड़ी मांग आगामी चुनावों को फिलहाल रोकने और SIR प्रक्रिया को फ्रीज करने से जुड़ी है। सौरव दास ने जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करने की मांग रखी। संगठन का कहना है कि SIR से जुड़े फैसलों और वोटर लिस्ट में हुए बदलावों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। इसके लिए एक स्वतंत्र जांच आयोग बनाने की मांग की गई है, ताकि SIR के दौरान लिए गए फैसलों और निर्णय लेने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा सके। CJP ने यह भी मांग रखी कि SIR से जुड़ी सभी फाइलों को सुरक्षित रखा जाए और इस प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में फाइलें रखने की मांग
सौरव दास ने SIR से जुड़े दस्तावेजों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से भी हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना है कि SIR से संबंधित फाइलों और निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड को अदालत की निगरानी में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे भविष्य में रिकॉर्ड के गायब होने या नष्ट होने को लेकर कोई सवाल खड़ा न हो। CJP की ये मांग ऐसे समय सामने आई है जब चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और SIR को लेकर बहस तेज है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं।
तीसरी मांग- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का कानून बदला जाए
CJP ने अपनी तीसरी मांग चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को लेकर रखी है। संगठन ने 2023 में बनाए गए कानून को खत्म कर नया कानून बनाने की मांग की है। सौरव दास के मुताबिक, नई व्यवस्था में नागरिक समाज के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए, ताकि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर लोगों का भरोसा मजबूत हो सके। CJP की ओर से ये मांग ऐसे समय रखी गई है जब चुनाव आयोग के भीतर फैसलों और SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि आयोग में अलग-अलग विचार और लिखित टिप्पणियां सामान्य deliberative process का हिस्सा हैं और SIR समेत पिछले साल के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
48 घंटे का अल्टीमेटम, देशभर में आंदोलन की चेतावनी
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे का समय देने की बात कही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तय समय में इस्तीफा नहीं दिया गया तो संगठन देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा। वहीं सौरव दास ने कहा कि उनका मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है, बल्कि युवाओं और मतदान के अधिकार से जुड़ा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR और आयोग के फैसलों को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर कहा है कि सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। ऐसे में CJP की मांगों के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।