छात्र संगठन CJP ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। संगठन का कहना है कि मुआवजा, कानूनी कार्रवाई और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर लिखित आश्वासन दिया जाना चाहिए। साथ ही CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि यदि सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है तो आंदोलन को देशभर में और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
सरकार से लिखित आश्वासन की उम्मीद
CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि संगठन की ओर से सरकार के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत चल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुआवजा, कानूनी कार्रवाई और अन्य लंबित विषयों पर सरकार की ओर से लिखित सहमति या आश्वासन मिल सकता है। उनका कहना है कि संगठन बातचीत के नतीजों का इंतजार कर रहा है और आगे की रणनीति उसी के आधार पर तय की जाएगी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग बरकरार
आशुतोष रांका ने कहा कि आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि संगठन इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। CJP का कहना है कि इस मांग पर स्पष्ट निर्णय आंदोलन के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।
मांगें नहीं मानी गईं तो होगा देशव्यापी आंदोलन
CJP ने संकेत दिया है कि यदि सरकार प्रमुख मांगों पर संतोषजनक जवाब नहीं देती है और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जाता, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति में जल्द ही देशव्यापी अभियान और विरोध कार्यक्रमों का ऐलान किया जा सकता है।
मुआवजा और जवाबदेही पर भी जोर
संगठन का कहना है कि केवल इस्तीफे की मांग ही नहीं, बल्कि प्रभावित छात्रों के लिए मुआवजा, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और पूरे मामले में जवाबदेही तय करना भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। CJP का मानना है कि इन मुद्दों पर ठोस और स्पष्ट निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
बातचीत के नतीजों पर टिकी आगे की रणनीति
फिलहाल संगठन की नजर सरकार के अगले कदम पर है। CJP का कहना है कि यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो उसी के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा। वहीं, यदि प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी और विरोध प्रदर्शन को व्यापक रूप दिया जाएगा।