ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के खुजेस्तान प्रांत में बन रहे डार्कहोविन न्यूक्लियर पावर प्लांट की साइट पर रविवार को यूएस प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। ईरान के एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन (एईओआई) ने इसकी जानकारी दी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एईओआई ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि यह हमला स्थानीय समय के अनुसार सुबह 3:39 बजे (जीएमटी के अनुसार 24:09 बजे) हुआ। संगठन ने इसे 'आक्रामक और क्रूर कार्रवाई' बताया और कहा कि यह ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों को रोक दिया
हालांकि, संगठन ने यह नहीं बताया कि इस हमले में कोई हताहत हुआ है या किसी तरह का नुकसान हुआ है। इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने रविवार को कहा कि उसने होर्मुज स्ट्रेट से असुरक्षित रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे दो 'नियमों का उल्लंघन करने वाले' जहाजों को रोक दिया।
जहाजों ने चेतावनी को नजरअंदाज किया
आईआरजीसी के आधिकारिक समाचार आउटलेट 'सेपा' न्यूज पर जारी बयान में कहा गया कि चार ऐसे जहाजों ने चेतावनी को नजरअंदाज किया, अपने नेविगेशन सिस्टम बंद कर दिए और अमेरिका के समर्थन से जलडमरूमध्य में 'अव्यवस्था पैदा करने' और गलत रास्ते से गुजरने की कोशिश की। बयान के मुताबिक, इनमें से दो जहाजों का 'हादसा हो गया' और उन्हें रोक लिया गया, जबकि बाकी दो जहाजों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया।
सेनाओं का पूरा नियंत्रण है
ईरानी नौसेना ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसकी सेनाओं का पूरा नियंत्रण है और इस जलमार्ग से गुजरने का एकमात्र सुरक्षित रास्ता वही है जिसे ईरान ने तय किया है। उसने यह भी कहा कि ईरान की अनुमति और उसके साथ तालमेल के बिना इस जलडमरूमध्य से तेल, गैस या रासायनिक खाद की ढुलाई नहीं की जा सकती।
50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक सतर्क
इससे पहले शनिवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा था कि अमेरिकी सेनाओं ने ईरान के सैन्य तटीय निगरानी केंद्रों, वायु रक्षा ठिकानों, समुद्री क्षमताओं और मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों पर हमलों का आठवां दौर पूरा कर लिया है। उसने कहा कि मध्य पूर्व में तैनात 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक 'पूरी तरह सतर्क' हैं। रविवार को ही ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने अमेरिका की ओर से ईरान और वहां के नागरिक ढांचे, जैसे पुलों, पर किए गए हमलों के जवाब में कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। ईरानी सेना ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयानों में कहा कि उसकी सेनाओं ने ड्रोन हमलों के दो दौर में अल-अदिरी कैंप और अली अल सलेम एयर बेस को निशाना बनाया।