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Cloud Burst Jammu: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के पाडेर सब-डिवीजन में गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे बादल फटने की भयावह घटना हुई। चशोटी गांव में हुई इस प्राकृतिक आपदा के बाद अचानक बाढ़ जैसे हालात बन गए। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, अब तक 38 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। यह स्थान मचैल माता मंदिर की यात्रा का शुरुआती प्वॉइंट है, जहां हादसे के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। फिलहाल राहत-बचाव कार्य तेजी से जारी है और स्थानीय लोग भी मदद में जुटे हुए हैं।
धार्मिक यात्रा के बीच आई आफत
चशोटी गांव मचैल माता यात्रा का प्रमुख पड़ाव है। हर साल अगस्त में आयोजित होने वाली इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार यात्रा 25 जुलाई से शुरू हुई थी और 5 सितंबर तक चलनी थी। हादसे के समय भी कई यात्री यहां मौजूद थे और मंदिर की ओर बढ़ने की तैयारी कर रहे थे। इस मार्ग पर जम्मू से किश्तवाड़ तक 210 किमी की दूरी तय करनी होती है, जिसमें पाडेर से चशोटी तक करीब 19.5 किमी सड़क मार्ग से वाहन जा सकते हैं। इसके बाद मचैल तक 8.5 किमी की पैदल यात्रा होती है। बादल फटने के बाद पानी और मलबे के तेज बहाव ने श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को चपेट में ले लिया।
प्रशासन और सेना की संयुक्त राहत कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई है और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने सिविल प्रशासन, पुलिस, सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को राहत-बचाव कार्य को और तेज करने के निर्देश दिए हैं। मौके पर चिकित्सा और राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है, जबकि लापता लोगों की तलाश के लिए ड्रोन और अन्य तकनीकी साधनों का भी उपयोग किया जा रहा है। प्रशासन ने कहा है कि प्रभावित लोगों को हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी और नुकसान का आकलन तेजी से किया जा रहा है।