
Cloudburst wreaks havoc: दक्षिण-पश्चिम मानसून विदाई की ओर है, लेकिन उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में आपदाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार तड़के उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बादल फटने से भारी तबाही हुई। सुबह करीब पांच बजे हुई इस घटना से तमसा, कारलीगाड़, टोंस और सहस्त्रधारा नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। नदियों का उफान तपोवन, आईटी पार्क, घंगौरा और घड़ी कैंट इलाकों में घुस आया, जिससे कई घर, दुकानें और मंदिर जलमग्न हो गए। विकास नगर में टोंस नदी में मजदूरों से भरा एक ट्रैक्टर बह गया। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 50 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।
देहरादून में बाढ़ और बचाव अभियान
देहरादून स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर भी आपदा की चपेट में आ गया। मंदिर परिसर और आसपास की दुकानें पानी के तेज बहाव में बह गईं। यहां दो लोगों के लापता होने की जानकारी है। राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर तैनात हैं। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू कर दिया है। देहरादून में 13 शव बरामद किए गए हैं, जबकि पिथौरागढ़ और नैनीताल जिलों से भी एक-एक शव मिला है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और लगातार निगरानी की जा रही है।
हिमाचल में भूस्खलन और नदी का कहर
इसी बीच हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में भी प्रकृति ने कहर बरपाया। मंगलवार को यहां भूस्खलन से एक मकान ढह गया, जिसमें एक ही परिवार के पांच लोग दब गए। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है और बाकी की तलाश जारी है। दरंग इलाके में मंदिर जा रहे दो लोग सुमा खड्ड के तेज बहाव में बह गए, जिनमें से एक का शव बरामद हो चुका है। धर्मपुर बस स्टैंड पर बारिश के बाद मलबा भर गया और कई बसें बह गईं। लगातार हो रही बारिश से हालात और गंभीर बने हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में इन राज्यों की स्थिति का जायजा ले चुके हैं और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है।