बादलों की आवाजाही : दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों मौसम का एक दिलचस्प और उलझाने वाला रूप देखने को मिल रहा है. सुबह से शाम तक आसमान में घने बादल छाए रहते हैं, कई बार तेज हवाएं भी चलती हैं, लेकिन बारिश या तो बहुत कम होती है या बिल्कुल नहीं होती। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब बादल मौजूद हैं तो बारिश क्यों नहीं हो रही। मौसम वैज्ञानिक इसे मॉनसून के "एक्टिव-ब्रेक साइकल" का हिस्सा मानते हैं, जो हर वर्ष अलग-अलग तीव्रता के साथ देखने को मिलता है.
क्या होता है एक्टिव-ब्रेक साइकल?
मॉनसून लगातार एक जैसी बारिश नहीं करता। इसके दो प्रमुख चरण होते हैं—एक्टिव फेज और ब्रेक फेज। एक्टिव फेज में मॉनसूनी हवाएं मजबूत रहती हैं, वातावरण में नमी भरपूर होती है और लगातार या अच्छी बारिश दर्ज होती है। वहीं ब्रेक फेज के दौरान मॉनसूनी सिस्टम कमजोर पड़ जाता है। इस समय बादल तो बनते हैं, लेकिन उनमें पर्याप्त नमी और अनुकूल परिस्थितियां नहीं होने के कारण वे अधिक बारिश नहीं कर पाते। यही वजह है कि आसमान बादलों से ढका होने के बावजूद जमीन तक पानी नहीं पहुंच पाता.
आखिर क्यों बन रहे हैं बादल?
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय दिल्ली के ऊपर अलग-अलग दिशाओं से आने वाली हवाओं का प्रभाव देखा जा रहा है। अरब सागर की ओर से नमी वाली हवाएं पहुंच रही हैं, जबकि उत्तर-पश्चिम दिशा से अपेक्षाकृत शुष्क हवाएं भी सक्रिय हैं। इन दोनों के मिलने से बादलों का निर्माण तो हो रहा है, लेकिन बारिश कराने के लिए जरूरी मजबूत ऊर्ध्वाधर गतिविधि विकसित नहीं हो पा रही। परिणामस्वरूप बादल छाए रहते हैं, उमस बढ़ती है और लोगों को बारिश का इंतजार करना पड़ता है.
गर्मी और उमस क्यों बढ़ रही है?
बारिश नहीं होने के कारण वातावरण में मौजूद नमी बाहर नहीं निकल पाती। इससे हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है और उमस महसूस होती है. बादल सूर्य की तेज किरणों को कुछ हद तक रोकते हैं, लेकिन जब वर्षा नहीं होती तो गर्मी और चिपचिपाहट दोनों बनी रहती हैं। यही कारण है कि मौसम अपेक्षाकृत बदला हुआ दिखाई देने के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिलती.
आगे क्या है संभावना?
मौसम विभाग का मानना है कि जैसे ही मॉनसून फिर से एक्टिव फेज में प्रवेश करेगा, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। किसी नए कम दबाव के क्षेत्र, मजबूत मॉनसूनी ट्रफ या अनुकूल हवाओं के बनने पर बादलों की मौजूदगी वास्तविक वर्षा में बदल सकती है। फिलहाल लोगों को बदलते मौसम के बीच उमस और बीच-बीच में हल्की फुहारों का सामना करना पड़ सकता है..
दिल्ली में बादलों के बावजूद बारिश न होना कोई असामान्य घटना नहीं है। यह मॉनसून के स्वाभाविक एक्टिव-ब्रेक साइकल का हिस्सा है, जिसमें कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ जाती हैं। जैसे ही मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल होंगी, मॉनसून फिर सक्रिय होगा और राजधानी में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। तब तक बादलों की आवाजाही लोगों को राहत की उम्मीद तो देती रहेगी, लेकिन वास्तविक राहत बारिश के साथ ही मिलेगी.