महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि वे कम से कम 'राम रक्षा स्तोत्र' के दो पन्ने पढ़कर दिखाएं। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर राजनीतिक आंदोलन करना उचित नहीं है।
नागपुर में 'राम रक्षा' आंदोलन
फडणवीस की यह टिप्पणी उस समय आई है, जब उद्धव ठाकरे ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर 18 जुलाई को नागपुर में 'राम रक्षा' आंदोलन करने की घोषणा की है। इससे पहले मुंबई में भी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन किया गया था।
राम रक्षा का पाठ करने को तैयार हूं
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, "मेरी सिर्फ इतनी अपेक्षा है कि उद्धव ठाकरे कम से कम राम रक्षा स्तोत्र के दो पन्ने पढ़ लें। भगवान राम के नाम पर राजनीतिक आंदोलन करना ठीक नहीं है। पिछली बार भी वे राम रक्षा नहीं पढ़ पाए थे। अगर वे तैयार हों तो मैं उनके साथ बैठकर राम रक्षा का पाठ करने को तैयार हूं। मुझे पूरा राम रक्षा स्तोत्र कंठस्थ है। अगर किसी को याद नहीं है तो कम से कम पढ़ना तो आना चाहिए। यह कैसा आंदोलन है कि आप 'राम रक्षा' आंदोलन शुरू करते हैं, लेकिन राम रक्षा स्तोत्र पढ़ भी नहीं सकते?"
केंद्र सरकार को कोई चिंता नहीं
मुख्यमंत्री ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर उद्धव ठाकरे की हालिया टिप्पणी को भी खारिज कर दिया। उद्धव ठाकरे ने हाल ही में कहा था कि वांगचुक की बुद्धिमत्ता का उपयोग देश के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन केंद्र सरकार ऐसे लोगों को देशद्रोही बताकर जेल भेज रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने वांगचुक की खराब होती सेहत को लेकर उनसे फोन पर बात की थी और केंद्र सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने कहा, "उद्धव ठाकरे एक निराश, हताश और परेशान व्यक्ति हैं। उनका राजनीतिक अस्तित्व लगातार कमजोर हो रहा है। सोनम वांगचुक हो या कोई और मुद्दा, वे केवल अपनी हताशा के कारण बयान दे रहे हैं।"
मकसद केवल राजनीतिक लाभ
वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी उद्धव ठाकरे पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें देर से समझ आई है। उन्होंने कहा, "उनकी स्थिति ऐसी है जैसे अपना घर जल रहा हो और वे दूर पहाड़ पर लगी आग बुझाने दौड़ रहे हों। सोनम वांगचुक के आंदोलन से लेकर यूबीटी गुट हर उस व्यक्ति का समर्थन करता है जो सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करता है। वे श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश जैसे उदाहरण बार-बार सामने लाते हैं। उनका मकसद केवल राजनीतिक लाभ लेना है।"