गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस पर शनिवार को समाजवादी पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अपने जन्मदिन पर बर्मिंघम से जितने में रथ मंगवाते थे और सैफई महोत्सव में जितना पैसा खर्च होता था, उतने में शिक्षा व्यवस्था बदल सकती थी। बच्चों का भविष्य सुधर सकता था। उन्होंने कहा कि जो लोग काम नहीं कर सकते, वे केवल प्रश्न खड़ा करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 2100 से अधिक विद्यालयों के भवन बेहतर बनाए गए हैं। कक्षा पांच तक बच्चों को बुनियादी दक्षता प्रदान करने के लिए निपुण अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले स्थिति ऐसी थी कि कई बच्चों को अक्षर और अंकों का ज्ञान तक नहीं था। ऐसे में गणित, विज्ञान और भाषा की समझ विकसित करना मुश्किल था।
योगी ने कहा कि पहले विद्यालय नकल के अड्डे बन गए थे। ठेके पर नकल होती थी और दूसरे राज्यों से लोग परीक्षा देने आते थे। कई मामलों में परीक्षार्थी की जगह दूसरा व्यक्ति परीक्षा देता था। सरकार ने ऐसे विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाना बंद कर दिया।
उन्होंने कहा कि पहली बार शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी गई है। शिक्षामित्रों का मानदेय 2017 में तीन हजार रुपये था, जो अब 18 हजार रुपये हो गया है। अनुदेशकों को 17 हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा है। शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्तर दे सकती है, लेकिन संस्कार नहीं दे सकती। शिक्षक ही विद्यार्थियों में सवाल पूछने और संस्कार ग्रहण करने की क्षमता विकसित करता है। उन्होंने कहा कि भारत आदिकाल से ज्ञान का उपासक रहा है और प्रदेश में शिक्षा की इस परंपरा को और मजबूत किया जाएगा।