लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम में शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक बदलाव का माध्यम बताते हुए कहा कि सरकार की कोशिश है कि आर्थिक अभाव किसी विद्यार्थी की पढ़ाई में बाधा न बने। लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में 148 करोड़ रुपये से ज्यादा की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि अंतरित की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई भी पात्र विद्यार्थी योजना के लाभ से वंचित न रहे और भुगतान निर्धारित समय पर सुनिश्चित किया जाए।
इस चरण में अन्य पिछड़ा वर्ग के 2,23,615 विद्यार्थियों को 60.01 करोड़ रुपये, अनुसूचित जाति के 1,59,959 विद्यार्थियों को 64.54 करोड़, सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों को 11.43 करोड़ और अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थियों को 12.06 करोड़ रुपये दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष 69 लाख विद्यार्थियों को करीब 6200 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई। उनके मुताबिक पिछले नौ वर्षों में चार करोड़ से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल चुका है।
समयबद्ध भुगतान पर जोर
योगी ने कहा कि 2017 से पहले अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिलने की शिकायतें थीं। उन्होंने कहा कि मामला सामने आने के बाद दो वर्षों की छात्रवृत्ति एक साथ उपलब्ध कराई गई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अप्रैल से जुलाई के बीच प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र विद्यार्थियों को समय से भुगतान मिले। समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को हर महीने भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि एससी-एसटी विद्यार्थियों के आंकड़ों की समीक्षा में करीब चार लाख बच्चों का डाटा पोर्टल पर दर्ज नहीं मिला था। इसके बाद उनके लिए पोर्टल शुरू कराया गया। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति व्यवस्था को स्वचालन से जोड़कर भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है।
छात्रवृत्ति मिलती तो राजभर नेता नहीं बनते
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर राजभर को उस समय समय पर छात्रवृत्ति मिल जाती तो वह पढ़-लिखकर होनहार बनते और शायद नेता नहीं बनते। योगी ने कहा कि तत्कालीन सरकार से छात्रवृत्ति नहीं मिलने के कारण राजभर पढ़ाई नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने मेहनत और संघर्ष किया, जनता की आवाज उठाई और आगे चलकर मंत्री बने। मुख्यमंत्री ने राजभर के थ्री-व्हीलर और टैक्सी चलाने के संघर्ष का भी उल्लेख किया।