चाणक्य डिफेंस डायलॉग में सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर समेत कई मुददों पर चर्चा की. इस दौरान उन्होंने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख का हवाला दिया. सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत हर तरह का जवाब देने में सक्षम है. आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते हैं. इसके साथ ही जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को पाकिस्तान के लिए एक ट्रेलर बताया.
बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते
इस दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि जब कोई देश राज्य प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो ये भारत के लिए चिंता का विषय बन जाता है. भारत प्रगति की बात करता है. अगर कोई हमारे रास्ते में बाधा बनता है, तो हमें उनके खिलाफ कुछ ना कुछ कार्रवाई तो करनी ही होगी. जब भी हम न्यू नॉर्मल के बारे में बात करते हैं, तो हमने कहा है कि बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते हैं. हम केवल एक शांतिपूर्ण प्रक्रिया अपनाने के लिए कह रहे हैं, जिसमें हम भी पूरी तरह से सहयोग करेंगे. तब तक हम आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों के साथ एक जैसा ही व्यवहार करेंगे. हम उन लोगों को जवाब देंगे जो आतंकवादियों को प्रोत्साहित करते हैं. वर्तमान समय में भारत इतना कुशल है कि वह किसी भी ब्लैकमेल के प्रयासों से नहीं डरता है.
ऑपरेशन सिंदूर तो बस ट्रेलर- जनरल द्विवेदी
थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर तो बस एक ट्रेलर था, जो कि 88 घंटों में खत्म हो गया. हम भविष्य में किसी भी परिस्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. अगर पाकिस्तान मौका देता है, तो हम उसे पड़ोसी देश के साथ जिम्मेदारी से पेश आना सिखाएंगे.
"आज के समय में हमारी प्रतिरोधक क्षमता बहुत मजबूत"
उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में लड़ाई कई क्षेत्रों में होती है. हम ये नहीं कह सकते हैं कि यह कब तक चलेगी. हमें केवल ये सुनिश्चित करना होगा कि हमारे पास लंबे समय तक चलने वाली रसद उपलब्ध रहे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे पास राजनीतिक इच्छाशक्ति है जो हमारी प्रतिरोधक क्षमता को और भी मजबूत करती है. आज के समय में हमारी प्रतिरोधक क्षमता बहुत मजबूत है.
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद में आई कमी
जनरल द्विवेदी ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के मुद्दे पर कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर के हालात में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है. इसके बाद राजनीतिक स्पष्टता आई है. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद में भी भारी कमी आ गई है.