Codeine syrup case: कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध खरीद बिक्री के मामले में बीते छह वर्षों में थोक दवा लाइसेंस जारी करने वाले खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्तों और ड्रग इंस्पेक्टरोंं की भूमिका संदेह के घेरे में है। कई फर्मों के सिर्फ कागजों पर संचालित होने के खुलासे के बाद विभाग के उच्चाधिकारियों ने बीते छह वर्षों में वाराणसी में तैनात दोनों रैंक के अफसरों की जांच शुरु कर दी है।
अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे
मामले की जांच में अब तक ऐसी कई फर्मों का खुलासा हुआ है जो सिर्फ कागज पर संचालित हो रही थीं। इसी वजह से लाइसेंस जारी करने वाले खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग के अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग की अतिरिक्त सचिव रेखा एस चौहान ने बताया कि मामले की पूरी पारदर्शिता से जांच की जा रही है। व्यापारियों के साथ साथ लाइसेंस जारी करने वाले सहायक आयुक्तों और ड्रग इंस्पेक्टरों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
126 फर्मों को कोडीनयुक्त कफ सिरप की सप्लाई की
बताते चलें कि मामले के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल की रांची स्थित शैली मेसर्स ट्रेडर्स ने वाराणसी की 126 फर्मों को कोडीनयुक्त कफ सिरप की सप्लाई की थी। इन फर्मों की जांच के दौरान कई बोगस पायी गयीं। कहीं लाइसेंस में दर्ज पते पर मकान मिला तो कहीं जनरल स्टोर जबकि नियमों के अनुसार लाइसेंस जारी करने से पहले ड्रग इंस्पेक्टर को मौके का निरीक्षण करना होता है। ऐसे में अलग अलग समय पर जारी हुए लाइसेंस की वजह से सहायक आयुक्तों व ड्रग इंस्पेक्टरों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
थोक दवा के 89 लाइसेंस जारी किये गये
वाराणसी में में वर्ष 2019 से अब तक एपुएसडीए में अलग-अलग अवधि में तीन सहायक आयुक्त और पांच ड्रग इंस्पेक्टर तैनात रहे हैं। इसी अवधि में थोक दवा के 89 लाइसेंस जारी किये गये।