Jamaat-e-Islami: जमात-ए-इस्लामी हिंद ने देश में बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं और सर्दियों में गरीबों की मुश्किलों पर गहरी चिंता जाहिर की है। संगठन ने समाज में बढ़ती नफरत और विभाजन को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बताते हुए सभी वर्गों से एकजुट होकर शांति और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की अपील की। जमात ने 2026 को न्याय, शांति, एकता और समावेशी विकास का वर्ष बनाने का आह्वान किया है, ताकि देश में सामाजिक सौहार्द और समानता को बढ़ावा मिल सके।
सांप्रदायिक बयानबाजी और हिंसा पर गंभीर सवाल
एक प्रेस वार्ता में जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि भारत की पहचान हमेशा से विविधता में एकता और सह-अस्तित्व की रही है, लेकिन मौजूदा समय में यह परंपरा दबाव में दिखाई दे रही है। उन्होंने सांप्रदायिक बयानबाजी, नफरत फैलाने वाले भाषणों, भीड़ हिंसा और धार्मिक आधार पर भेदभाव की घटनाओं में बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उनका कहना था कि कुछ तत्व राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का दुरुपयोग कर समाज में खाई पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने देश की जनता की समझ और नैतिक शक्ति पर भरोसा जताया और कहा कि समाज मिलकर ऐसी ताकतों का सामना कर सकता है।
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गरीबों और अल्पसंख्यकों के समर्थन की अपील
जमात के एक अन्य उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने सर्दियों में बेघर और गरीब लोगों की स्थिति पर ध्यान दिलाते हुए बताया कि संगठन कई राज्यों में कंबल वितरण और राहत अभियानों के जरिए जरूरतमंदों की मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि सहायता धर्म या जाति देखकर नहीं, बल्कि इंसानियत के आधार पर दी जा रही है। साथ ही, उन्होंने ईसाई समुदाय और पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ कथित हिंसा की घटनाओं पर भी चिंता जताई। संगठन ने सरकार से ठोस कदम उठाने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने और नागरिकों से सहयोग की अपील की, ताकि देश में न्याय, सुरक्षा और विश्वास का माहौल कायम रह सके।