High Court Questions Land Use: दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी के प्रमुख हरित क्षेत्रों और खुले मैदानों के संरक्षण को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) को परिसर खाली करने के केंद्र सरकार के नोटिस पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि दिल्ली में पहले से ही खुले और हरित क्षेत्रों की कमी है, ऐसे में इन स्थानों के भविष्य को लेकर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मामले में पटियाला हाउस कोर्ट को याचिका पर जल्द सुनवाई कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
पब्लिक वेलफेयर के तर्क पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि संबंधित भूमि का उपयोग सार्वजनिक हित और जनकल्याण के लिए किया जाना है। इस पर अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि हर खुले क्षेत्र को निर्माण कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा तो राजधानी में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। अदालत ने संकेत दिया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
हरित क्षेत्रों को बताया शहर के ‘फेफड़े’
कोर्ट ने टिप्पणी की कि बड़े शहरों में खुले मैदान और हरित क्षेत्र नागरिकों के लिए राहत का काम करते हैं। न्यायालय ने चिंता जताई कि लगातार बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण ऐसे स्थानों की संख्या कम होती जा रही है। अदालत का मानना था कि इन क्षेत्रों का संरक्षण शहरी जीवन की गुणवत्ता और पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।
जनसंख्या वृद्धि और भूमि की जरूरत पर बहस
केंद्र सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि बढ़ती आबादी के कारण अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता महसूस हो रही है और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग सार्वजनिक जरूरतों के अनुसार करना जरूरी है। हालांकि अदालत ने इस तर्क पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विकास योजनाओं में पर्यावरणीय प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि भविष्य में नागरिकों को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
पटियाला हाउस कोर्ट को जल्द सुनवाई के निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने पटियाला हाउस कोर्ट को निर्देश दिया कि वह इंडियन पोलो एसोसिएशन की स्थगन याचिका पर शीघ्र सुनवाई करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाद के कानूनी पहलुओं पर संबंधित अदालत विचार करेगी। फिलहाल इस मामले ने राजधानी में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।