WHO ने दी नई जानकारी : World Health Organization ने हंतावायरस संक्रमण को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है. हाल ही में सामने आए मामलों के बाद दुनियाभर में इस वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब WHO ने स्पष्ट किया है कि हंतावायरस का संक्रमण आमतौर पर लंबे समय तक इंसानों में सक्रिय रूप से फैलने वाला नहीं माना जाता और इसका मानव-से-मानव संक्रमण सीमित परिस्थितियों में ही देखा गया है.
क्या है हंतावायरस?
हंतावायरस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरस है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और दूसरे कृन्तकों के संपर्क से फैलता है. यह वायरस उनके मल, मूत्र या लार के जरिए इंसानों तक पहुंच सकता है. WHO के अनुसार अधिकांश मामलों में संक्रमण सीधे संक्रमित जानवरों से ही फैलता है. विशेषज्ञों का कहना है कि बंद और गंदे स्थानों की सफाई करते समय संक्रमित धूल के कण सांस के जरिए शरीर में जा सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
इंसानों में कब तक रहता है खतरा?
WHO के मुताबिक हंतावायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड यानी संक्रमण के बाद लक्षण दिखने का समय लगभग 1 से 6 सप्ताह तक हो सकता है. हालांकि मानव-से-मानव संक्रमण केवल एंडीज वायरस स्ट्रेन में सीमित रूप से देखा गया है और वह भी बहुत करीबी तथा लंबे संपर्क में. हालिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में वायरस शरीर के कुछ हिस्सों में लंबे समय तक मौजूद रह सकता है. एक रिसर्च में दावा किया गया कि एंडीज हंतावायरस पुरुषों के वीर्य में कई वर्षों तक रह सकता है। हालांकि WHO ने अभी इसे बड़े स्तर के सार्वजनिक खतरे के रूप में घोषित नहीं किया है.
WHO ने लोगों को क्या सलाह दी?
WHO ने कहा है कि फिलहाल इस वायरस को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. संगठन के अनुसार यह कोविड-19 जैसी तेजी से फैलने वाली बीमारी नहीं है। अधिकतर संक्रमण संक्रमित कृन्तकों के संपर्क से ही जुड़े हुए हैं. विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे घरों और गोदामों की सफाई करते समय मास्क और ग्लव्स का इस्तेमाल करें। साथ ही चूहों की मौजूदगी वाले इलाकों में सावधानी बरतें.
दुनिया भर में निगरानी तेज
हाल में एक क्रूज शिप से जुड़े मामलों के बाद कई देशों ने निगरानी बढ़ा दी है. WHO ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और अभी तक महामारी जैसी स्थिति बनने के संकेत नहीं मिले हैं.