अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के पूर्वी हिस्से में हुई एक भीषण दुर्घटना ने दुनिया भर की टेक इंडस्ट्री की चिंता बढ़ा दी है। रुबाया इलाके की कोल्टन खदान में भारी बारिश के बाद आए भूस्खलन में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह वही इलाका है, जहां से वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अहम खनिज की बड़ी आपूर्ति होती है।
कैसे हुआ हादसा?
यह त्रासदी जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में तब हुई, जब लगातार बारिश से पहाड़ी इलाकों की मिट्टी कमजोर हो गई। पहले एक बड़ा हिस्सा खिसका और फिर अगले दिन दूसरा भूस्खलन हुआ, जिसने खदान के कई हिस्सों को पूरी तरह ढक दिया। उस वक्त दर्जनों मजदूर हाथ से कोल्टन निकाल रहे थे। कीचड़ और पत्थरों के नीचे दबे कई शव अभी भी निकाले जा रहे हैं, जबकि घायलों का इलाज नजदीकी अस्पतालों में चल रहा है।
रुबाया खदान की वैश्विक अहमियत
उत्तर किवु प्रांत में स्थित यह खदान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण कोल्टन क्षेत्रों में गिनी जाती है। इसी खनिज से टैंटलम तैयार होता है, जिसका इस्तेमाल स्मार्टफोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, विमान इंजन और मेडिकल उपकरणों में होता है। अनुमान है कि वैश्विक सप्लाई का 15 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का संकट अंतरराष्ट्रीय बाजार को प्रभावित कर सकता है।
संघर्ष और मिलिशिया का नियंत्रण
पूर्वी कांगो दशकों से हिंसक संघर्षों का केंद्र रहा है, जहां कई सशस्त्र समूह सक्रिय हैं। रुबाया खदान पर एम23 नामक विद्रोही संगठन का कब्जा बताया जाता है, जो यहां से टैक्स वसूलता है और खनन गतिविधियों को नियंत्रित करता है। इस वजह से सरकारी निगरानी और सुरक्षा इंतजाम कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे मजदूरों की जान लगातार खतरे में रहती है।
क्यों बार-बार होते हैं ऐसे हादसे?
इस इलाके में ज्यादातर खनन आर्टिसनल तरीके से होता है, यानी मजदूर बिना आधुनिक मशीनों या इंजीनियरिंग सपोर्ट के खुदाई करते हैं। न तो सुरंगों को मजबूत करने की व्यवस्था होती है और न ही बारिश के मौसम के लिए सुरक्षा इंतजाम। ऊपर से लंबे समय से चला आ रहा संघर्ष विकास कार्यों में बाधा बनता है, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।
दुनिया की टेक इंडस्ट्री पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस क्षेत्र से सप्लाई लंबे समय तक बाधित रही, तो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उत्पादन पर दबाव पड़ सकता है। कंपनियों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे लागत बढ़ने की आशंका है। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि आधुनिक तकनीक के पीछे कई बार खतरनाक और दर्दनाक परिस्थितियां छिपी होती हैं। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन भारी मलबे के कारण स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।