भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस समझौते को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए देशव्यापी किसान सम्मेलन करने का फैसला लिया है। इसकी पहली बड़ी बैठक 24 फरवरी को भोपाल में होगी, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेता शामिल होकर किसानों से सीधा संवाद करेंगे और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएंगे।
24 फरवरी को भोपाल में किसान सम्मेलन
भारत–अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में कांग्रेस 24 फरवरी को भोपाल में किसान सम्मेलन आयोजित करेगी। इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी विशेष रूप से शामिल होंगे। भोपाल से शुरू होने वाला यह अभियान आगे अन्य राज्यों तक भी ले जाया जाएगा।
दिल्ली बैठक में बनी रणनीति
इस किसान सम्मेलन से पहले दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व की एक अहम बैठक हुई, जिसमें छह राज्यों के पीसीसी अध्यक्ष और सीएलपी नेता शामिल हुए। बैठक में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के नेताओं ने भाग लिया। बैठक के बाद वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बताया कि ट्रेड डील को लेकर गहन चर्चा की गई है और इसके संभावित प्रभावों पर चिंता जताई गई।
किन किसानों पर पड़ेगा सीधा असर
कांग्रेस का दावा है कि इस ट्रेड डील का पहला और सीधा असर कपास, सोयाबीन, मक्का, फल और मेवे की खेती करने वाले किसानों पर पड़ेगा। पार्टी का कहना है कि इन छह राज्यों में लाखों किसान इस समझौते से प्रभावित होंगे। इसी वजह से पहले चरण में इन्हीं राज्यों को केंद्र में रखकर किसान सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।
भोपाल के बाद महाराष्ट्र और राजस्थान में सम्मेलन
कांग्रेस ने साफ किया है कि भोपाल के बाद 7 मार्च को महाराष्ट्र के यवतमाल में दूसरा किसान सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद मार्च महीने में तीसरा सम्मेलन श्रीगंगानगर, राजस्थान में होगा। संसद सत्र दोबारा शुरू होने से पहले इन सम्मेलनों के जरिए कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
कांग्रेस का आरोप: किसानों के हितों से समझौता
कांग्रेस नेतृत्व ने ट्रेड डील को प्रधानमंत्री का “सरेंडर” करार दिया है। पार्टी का कहना है कि इस समझौते से किसानों की आजीविका पर खतरा पैदा हो गया है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि जिस तरह पहले कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन हुआ था, उसी तरह अब किसान संगठनों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा और इस मुद्दे को जनता के बीच जोर-शोर से उठाया जाएगा।