
चुनाव आयोग ने कांग्रेस की ओर से लगाए हुए आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि मतदाता सूची से नाम को हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी और नियमानुसार है. एक कॉन्फ्रेंस में आयोग ने इस बात की पुष्टि की है। बिहार में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों ने बीते एक-दो दिनों में जिला निर्वाचन अधिकारियों को करीब 89 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए पत्र लिखे हैं लेकिन यह प्रक्रिया नियमों का उल्लंघन है.
उन्होंने बताया कि नियमानुसार व चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत कोई भी नाम काटने की आपत्तियां निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 13 के तहत सिर्फ फॉर्म 7 में दी जा सकती है। बूथ लेवल एजेंट्स, जोकि राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त किए जाते हैं। निर्धारित प्रपत्र व लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के अनुसार, घोषणा के साथ दिया जा सकता है।
आपत्तियां तय प्रपत्र में नहीं हैं
बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने 22 अगस्त के अंतरिम आदेश में यह तय किया किया है कि 12 राजनीतिक दलों के प्रारूप मतदाता सूची में किसी भी गलत नाम की जानकारी संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अफसर को तय प्रारूप में जमा कराएं। कांग्रेस पार्टी ने जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों की ओर दी गई आपत्तियां तय प्रपत्र में नहीं हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी इन आपत्तियों को संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को तय कार्यवाही के लिए आगे बढ़ा रहे हैं।