Mp politics: मध्यप्रदेश कांग्रेस में नए जिलाध्यक्षों की सूची जारी होते ही घमासान मच गया है। पार्टी ने 71 जिलाध्यक्षों की घोषणा की, जिसमें करीब 50 प्रतिशत पद आरक्षित वर्ग को दिए गए हैं। लेकिन अल्पसंख्यक वर्ग की अनदेखी के आरोपों के बीच रीवा जिले के वरिष्ठ नेता अशफाक अहमद ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे से कांग्रेस में हलचल तेज हो गई है और कई जगह विरोध प्रदर्शन भी सामने आ रहे हैं। यह विवाद पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द बनता दिख रहा है।
71 जिलाध्यक्षों की सूची पर बवाल
कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव 2028 को ध्यान में रखते हुए जिलाध्यक्षों की सूची जारी की है। इस सूची में 10 एससी, 8 एसटी, 11 ओबीसी, 3 अल्पसंख्यक और 4 महिलाओं को पद दिए गए हैं। साथ ही 6 मौजूदा और 11 पूर्व विधायकों को भी जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश में तीन पूर्व मंत्रियों को भी जिला अध्यक्ष बनाया गया है। लेकिन कई जगह नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस सूची पर खुलकर असहमति जताई है।
वरिष्ठ नेता अशफाक अहमद ने दिया त्यागपत्र
रीवा के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशफाक अहमद ने इस्तीफा देकर पार्टी में भूचाल ला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों की उपेक्षा की है। अहमद कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता, अल्पसंख्यक विभाग के उपाध्यक्ष और विधि एवं मानव अधिकारी विभाग के सचिव रह चुके हैं। वे लंबे समय से सक्रिय नेता रहे हैं। उनके त्यागपत्र के बाद रीवा समेत आसपास के क्षेत्रों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ गया है।
कई जिलों में विरोध की लहर
सूची जारी होने के बाद प्रदेशभर से विरोध की खबरें आ रही हैं। गुना में जयवर्धन सिंह को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर भी विरोध हुआ और कार्यकर्ताओं ने पीसीसी चीफ का पुतला फूंका। वहीं रीवा से सटे पन्ना और सतना सिटी में मुस्लिम वर्ग के नेताओं अनीश खान और आरिफ इकबाल सिद्दीकी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है, लेकिन इससे भी असंतोष कम नहीं हुआ है।