उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक छोटी सी मुलाकात की कोशिश ने बड़ा सियासी संदेश दे दिया है। कांग्रेस के कुछ नेता बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती से मिलने उनके आवास पहुंचे, लेकिन उन्हें बिना मुलाकात लौटना पड़ा। इसके बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया। अब इस पूरे घटनाक्रम को 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
कौन पहुंचा था आवास
कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया मायावती के आवास पहुंचे थे। जानकारी के मुताबिक सुरक्षा कर्मचारियों ने उनका संदेश अंदर पहुंचाया, लेकिन मुलाकात की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद दोनों नेता वापस लौट आए। इसी घटना के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह के सवाल उठने लगे।
कांग्रेस ने क्या दी सफाई
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने कहा कि पार्टी कार्यालय में अनुसूचित जाति विभाग की बैठक हुई थी। उसी दौरान मायावती के स्वास्थ्य को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि मायावती समाज की वरिष्ठ नेता हैं और उनका हालचाल जानने के लिए वे सामान्य मुलाकात के इरादे से गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था।
राजनीतिक अटकलें तेज
हालांकि इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं रुक नहीं रही हैं। माना जा रहा है कि राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे और मिशन 2027 की तैयारी के बीच यह मुलाकात काफी अहम हो सकती थी। इसी कारण कई लोग इसे संभावित राजनीतिक संवाद और विपक्षी रणनीति से जोड़कर भी देख रहे हैं।
मायावती का रुख क्या कहता
मायावती पहले भी कई बार साफ कर चुकी हैं कि वह अपनी राजनीतिक रणनीति पर अलग रास्ता अपनाती रही हैं। पिछले कुछ समय से बसपा की ओर से गठबंधन को लेकर कोई सकारात्मक संकेत भी सामने नहीं आए हैं। ऐसे में इस मुलाकात का न होना राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
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अब आगे किस पर नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव से पहले हर छोटी घटना को बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात थी या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक कोशिश छिपी थी। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर 2027 की सियासत को चर्चा के केंद्र में ला दिया है और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं लगातार तेज बनी हुई हैं।