Congress Seva Dal RSS Pracharak ----मध्यप्रदेश की सियासत में अब राजनीतिक मुकाबले के साथ वैचारिक स्तर पर भी नई तैयारी दिखाई दे रही है। कांग्रेस सेवादल ने प्रदेश में एक ‘विचारक टीम’ तैयार करने की रणनीति बनाई है। संगठन का कहना है कि यह टीम गांव और बूथ स्तर तक पहुंचकर लोगों के बीच अपने विचार और मुद्दे रखेगी। इसी रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए भोपाल में प्रदेशभर के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद प्रशिक्षण शिविरों के जरिए संगठन को विस्तार देने की तैयारी है।
भोपाल में जुटेंगे सेवादल के पदाधिकारी
कांग्रेस सेवादल की ओर से भोपाल में आयोजित होने वाली बैठक में प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों को बुलाया गया है। बैठक में संगठन को मजबूत करने और उसकी गतिविधियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर चर्चा होगी। इसके बाद प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाने की तैयारी है। इन कैंप के जरिए कार्यकर्ताओं को संगठन की विचारधारा और स्थानीय मुद्दों को लोगों तक पहुंचाने के लिए तैयार किया जाएगा।
‘प्रचारक’ के जवाब में तैयार होंगे ‘विचारक’
सेवादल प्रदेश अध्यक्ष अवनीश भार्गव ने संगठन की इस रणनीति को ‘प्रचारक’ के जवाब में ‘विचारक’ तैयार करने की पहल बताया है। उनके मुताबिक, RSS अपने प्रचारकों के जरिए विचारधारा को लोगों तक पहुंचाता है। इसी तर्ज पर कांग्रेस सेवादल अब ऐसे कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करेगा, जो जनता के बीच जाकर संगठन के विचार और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को सामने रखेंगे। इस टीम की भूमिका सिर्फ राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक मुद्दों पर संवाद करने की भी बताई गई है।
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ब्लॉक से बूथ और गांव तक पहुंचने की तैयारी
सेवादल की योजना संगठन को केवल जिला या शहर तक सीमित रखने की नहीं है। प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से इसकी पहुंच ब्लॉक, बूथ और गांव स्तर तक बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। संगठन का जोर ऐसे कार्यकर्ताओं को तैयार करने पर है, जो स्थानीय स्तर पर लोगों से सीधे संवाद कर सकें और उनके मुद्दों को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना सकें। इसके जरिए सेवादल अपनी जमीनी सक्रियता बढ़ाने की कोशिश करेगा।
MP में तेज हो सकती है वैचारिक सियासत
कांग्रेस सेवादल का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मुकाबला लगातार बना हुआ है। सेवादल ने साफ किया है कि उसकी ‘विचारक टीम’ नफरत और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने तथा लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को सामने रखने का काम करेगी। ऐसे में संगठन की नई रणनीति आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में वैचारिक बहस को और तेज कर सकती है। अब नजर भोपाल की बैठक और उसके बाद शुरू होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर रहेगी।