लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। सिद्दीकी ने अपने समर्थकों के साथ यह फैसला लिया है, जिससे यूपी की सियासत में हलचल मच गई है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं। वे बसपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं और बाद में बसपा से निष्कासित होने के बाद 2018 में कांग्रेस में शामिल हुए थे। कांग्रेस में वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष के पद पर भी रहे। उनकी यह पार्टी छोड़ने की घोषणा कांग्रेस के लिए विशेष रूप से करारा झटका मानी जा रही है, क्योंकि सिद्दीकी पश्चिमी यूपी में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण आधार थे। इस्तीफा देते हुए सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी कांग्रेस पदाधिकारी से व्यक्तिगत रूप से कोई शिकायत या मतभेद नहीं है।
उन्होंने कहा, मैंने कांग्रेस में जिस उद्देश्य और काम के लिए प्रवेश किया था, वह काम यहां नहीं हो पा रहा है। इसलिए मैंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया है। उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही वे एक नई शुरुआत करेंगे और इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। सिद्दीकी ने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाया कि वे जनता के मुद्दों पर काम जारी रखेंगे और नई राह चुनेंगे।
यह घटना कांग्रेस के लिए तब और गंभीर हो जाती है, जब पार्टी पहले से ही यूपी में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। सिद्दीकी जैसे अनुभवी और प्रभावशाली नेता के जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम और बहुजन वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषक का मानना है कि यह कदम आने वाले दिनों में यूपी की सियासत को नई दिशा दे सकता है। सिद्दीकी ने कहा कि उनका फैसला सोच-समझकर लिया गया है और वे जल्द ही अपनी आगे की योजना के बारे में विस्तार से बताएंगे। फिलहाल, कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।