MLC elections: चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली। पार्टी ने कर्नाटक, बिहार और महाराष्ट्र में कुल 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सभी जगह उसे हार का सामना करना पड़ा। इनमें कुछ ऐसी सीटें भी शामिल थीं, जहां कांग्रेस पहले जीत दर्ज कर चुकी थी। इन नतीजों के बाद पार्टी के चुनावी प्रदर्शन और विपक्षी गठबंधन के तालमेल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
कर्नाटक में सत्ता के बावजूद नहीं मिली सीट
कर्नाटक की चार विधान परिषद सीटों पर कांग्रेस ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इनमें एक सीट कांग्रेस के पास थी, जिसे जनता दल (सेक्युलर) ने अपने नाम कर लिया। इन चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवारों ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी का खाता नहीं खुला।
बिहार में गठबंधन की खींचतान के बीच चुनाव
बिहार में कांग्रेस ने आठ में से पांच सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ सीटों को लेकर सहमति नहीं बनने के बाद पार्टी ने अलग-अलग सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। हालांकि, कांग्रेस को किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। पिछली बार इस सीट से कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा निर्वाचित हुए थे।
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महाराष्ट्र में भी नहीं मिली सफलता
महाराष्ट्र की पांच सीटों में से कांग्रेस ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने दो सीटों पर उम्मीदवार उतारे। कांग्रेस तीनों सीटें हार गई, जिनमें दो सीटें उसकी मौजूदा सीटें बताई गई हैं। इसके विपरीत, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) ने अपने हिस्से की दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के उम्मीदवार को एक लाख से अधिक वोट मिले, जबकि पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार को दस हजार से भी कम वोट मिलने का दावा किया गया है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने नहीं उतारे उम्मीदवार
उत्तर प्रदेश की विधान परिषद सीटों पर कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतारे। यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला रहा। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और गठबंधन की रणनीति पर भी चर्चा जारी है। हालांकि, विधान परिषद चुनाव के नतीजों को विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि दोनों चुनावों की परिस्थितियां और मतदाता समूह अलग होते हैं।