मध्यप्रदेश के पचमढ़ी में कांग्रेस का 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर रविवार से शुरू हो गया है। इस शिविर में प्रदेशभर के 71 जिलाध्यक्ष हिस्सा ले रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि यह शिविर संगठन को मजबूत करने और जिलाध्यक्षों को सशक्त बनाने का बड़ा प्रयास है। वहीं विपक्ष ने इसे दिखावा बताते हुए तंज कसा है। आने वाले चुनावी वर्ष को देखते हुए कांग्रेस इस शिविर के माध्यम से अपनी संगठनात्मक पकड़ मजबूत करना चाहती है।
जिलाध्यक्षों को संगठन की रीति-नीति का प्रशिक्षण
शिविर में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की प्रशिक्षण टीम के सदस्य, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मौजूद रहेंगे। यहां जिलाध्यक्षों को संगठन की कार्यप्रणाली, जिम्मेदारियों और जनता तक पार्टी की नीतियां पहुंचाने के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। पार्टी चाहती है कि नए जिलाध्यक्ष अपने जिलों में संगठन को नए सिरे से खड़ा करें।
रणनीति बनेगी भाजपा को जमीनी स्तर पर घेरने की
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि शिविर में SIR, बेरोजगारी, शराबबंदी और सामाजिक मुद्दों पर विशेष सत्र होंगे। कांग्रेस का फोकस जमीनी मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति पर रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे और गलत प्रवृत्तियों से दूर रखने के लिए संगठन को जागरूकता की दिशा में काम करना होगा।
शीर्ष नेताओं का मार्गदर्शन और संवाद सत्र
शिविर के दौरान राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल और सुप्रिया श्रीनेत जैसे वरिष्ठ नेता विभिन्न विषयों पर संवाद करेंगे। उनका उद्देश्य जिलाध्यक्षों को नेतृत्व, संवाद और संगठन प्रबंधन की तकनीक सिखाना है, ताकि वे आने वाले विधानसभा चुनावों में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
विपक्ष ने बताया ‘दिखावा’, उठाए सवाल
राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने कांग्रेस के इस प्रशिक्षण को मात्र ‘राजनीतिक दिखावा’ बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास न संगठन है, न नीति और न निष्ठा। उनके मुताबिक, पार्टी आंतरिक विवादों में उलझी है और ऐसे में किसी भी प्रशिक्षण का परिणाम व्यर्थ रहेगा। अब देखना यह है कि यह शिविर कांग्रेस को नई ऊर्जा देगा या महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएगा।