अयोध्या राम मंदिर 'चंदा चोरी'पर PM मोदी को कांग्रेस का पत्र सामने आया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई है। 30 जून 2026 को कांग्रेस ने PM नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राम मंदिर के दानपात्र से 'चंदा चोरी' की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग को उठाया है।
कांग्रेस और सपा की मांगे
कांग्रेस ने राम मंदिर ट्रस्ट पर 13 सवाल उठाते हुए मांग की है कि "पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए"। वहीं सपा सांसद अवधेश प्रसाद बोले - "निष्पक्ष जांच के लिए पहले राम मंदिर ट्रस्ट को भंग किया जाए और सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों को हटाया जाए। राम मंदिर में शुरुआत से अब तक आए पूरे चढ़ावे और दान का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए"।
क्या है 'चंदा चोरी' का पूरा मामला?
200 करोड़ से ज्यादा का घोटाले आरोप लगा है। दानपात्रों से 200 करोड़ रुपए से ज्यादा का चढ़ावा गायब है। याचिका में आरोप है कि "10 चेस्ट-बॉक्स, जिनमें भक्त सोना-चांदी डालते थे, 'टिन्नू' ने बिना अकाउंटिंग एंट्री या रसीद के हटा दिए"। जब कर्मचारी ने वाउचर पर साइन करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया तो "गोपाल राव ने कहा कि उनका काम सिर्फ 'बैठना' है, न कि प्रक्रिया पर सवाल उठाना"।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
अधिवक्ता अनूप अवस्थी ने CJI को पत्र लिखकर मांग की है कि FIR दर्ज कर कोर्ट की निगरानी में CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच हो। मंदिर में प्राप्त दान, उसके लेखांकन, प्रबंधन और उपयोग के सभी पहलुओं की जांच की जाए"। अवस्थी ने कहा - "दान सिर्फ पैसा नहीं, श्रद्धालुओं का विश्वास है। SIT जांच पर्याप्त नहीं"।
सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं
सपा प्रमुख ने सबसे पहले राम मंदिर चंदा चोरी का मुद्दा उठाया। भाजपा नेता विनय कटियार ने कहा, "ये सब चोर हैं। इनकी छुट्टी करो... ये भागेंगे या फिर जेल जाएंगे"। सरकार ने 3 सदस्यीय SIT बनाई है। इस पर मंत्री सूर्य प्रताप शाही बोले - "जांच की जिम्मेदारी मंदिर ट्रस्ट की है। इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है"। कांग्रेस ने PM मोदी को पत्र लिखकर 200 करोड़ की 'चंदा चोरी' पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच मांगी है। सुप्रीम कोर्ट के वकील ने भी CJI को चिट्ठी लिखी है। सरकार की SIT पर विपक्ष को भरोसा नहीं, इसलिए न्यायिक निगरानी की मांग तेज हो गई है। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी पहुंचा है।