
आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल में ईयरफोन और हेडफोन हमारे रोजमर्रा के साथी बन चुके हैं. चाहे सुबह जॉगिंग के वक्त गाने सुनना हो, ऑफिस मीटिंग अटेंड करनी हो या रात को रिलैक्स होकर पॉडकास्ट सुनना. ईयरफोन हर पल साथ रहता है लेकिन एक्सपर्ट्स ने अब एक ऐसी चेतावनी दी है, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगी. लगातार ईयरफोन यूज़ करना आपकी सुनने की क्षमता को बुरी तरह नुकसान पहुंचा सकता है. इसे मेडिकल भाषा में Noise Induced Hearing Loss कहा जाता है. दरअसल, ईयरफोन कान के पर्दे के बेहद पास होते हैं, जहां से निकलने वाली तेज आवाजें कान के अंदर की संवेदनशील कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं. लंबे समय तक ऐसा करने से बहरापन या टिनिटस (कानों में घंटी या सनसनाहट की आवाज़) जैसी परेशानियां हो सकती हैं.
एक्सपर्ट्स का सुझाव ‘60-60 रूल’ अपनाएं!
दरअसल आवाज को 60% से ज़्यादा न रखें और एक बार में 60 मिनट से ज़्यादा ईयरफोन न लगाएं. हर घंटे के बाद 10 मिनट का ब्रेक जरूर लें ताकि कानों को आराम मिले. इसके अलावा दिनभर में दो घंटे से ज़्यादा ईयरफोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. 85 डेसिबल से ऊपर की आवाज आपके कानों के लिए खतरनाक हो सकती है. कई लोग सोचते हैं कि आवाज तेज करके सुनना क्वालिटी म्यूजिक देता है, लेकिन हकीकत में ये कान के अंदर की कॉक्लिया नामक संरचना को नुकसान पहुंचाता है. कॉक्लिया के भीतर बाल जैसी महीन कोशिकाएं होती हैं, जो साउंड वाइब्रेशन को दिमाग तक पहुंचाती हैं. लगातार तेज आवाज से ये कोशिकाएं डैमेज हो जाती हैं, जिससे सुनने की शक्ति धीरे-धीरे घटती जाती है.
अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो सावधान हो जाएं!
ईयरफोन से होने वाले नुकसान के शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं कानों में लगातार घंटी बजना या गूंज सुनाई देना, आसपास के लोगों की बात समझने में दिक्कत होना या बार-बार किसी से बात दोहराने को कहना. कई बार लोग इसे हल्के में ले लेते हैं, लेकिन ये स्थायी हियरिंग लॉस की शुरुआत हो सकती है. इसलिए अगर ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. समय पर इलाज से ये नुकसान रोका जा सकता है, लेकिन देर होने पर ये स्थायी भी हो सकता है.
कान बचाने के लिए अपनाएं ये हेल्दी आदतें!
अगर आप म्यूजिक लवर हैं, तो ईयरफोन की जगह Over the Ear हेडफोन का इस्तेमाल करें, जो कान के पर्दे से थोड़ी दूरी बनाए रखते हैं. इससे प्रेशर कम पड़ता है. इसके अलावा Noise Cancelling हेडफोन यूज करें, ताकि आपको आवाज तेज करने की ज़रूरत न पड़े. ध्यान रहे हेडफोन भी खतरे से खाली नहीं हैं, लेकिन ईयरफोन की तुलना में ये थोड़े सुरक्षित हैं.