लखनऊ। शहरी क्षेत्रों में रोजगार की तलाश में आने वाली कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योगी सरकार ने आठ श्रमजीवी महिला छात्रावासों के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। कुल स्वीकृत धनराशि का 66 प्रतिशत प्रथम किस्त के रूप में जारी किया जा चुका है। इससे निर्माण कार्य को गति मिली है। एसएएससीआई योजना के तहत प्रदेश में यह परियोजना चल रही है। कुल ₹382 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
सीएंडडीएस को दी गई जिम्मेदारी
प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2025 में सीएंडडीएस को इस परियोजना का कार्यदायी संस्थान नामित किया है। विभागीय स्तर पर भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया पूरी कर संबंधित विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। लखनऊ में तीन, गौतमबुद्धनगर में चार और गाजियाबाद में एक समेत कुल आठ छात्रावासों का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। प्रत्येक छात्रावास की क्षमता 500 महिलाओं की होगी। इस प्रकार कुल 4,000 कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आवास सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी।
महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर
यह योजना केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। योगी सरकार का फोकस स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़े और उन्हें कार्यस्थल के साथ-साथ आवासीय सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से समयसीमा के अंदर पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि गुणवत्ता और तय समयसीमा का पालन सुनिश्चित हो सके।
इस पहल से प्रदेश के शहरी श्रमबल को मजबूती मिलेगी और कामकाजी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी। सुरक्षित और किफायती छात्रावास व्यवस्था महिलाओं को रोजगार के अवसरों से जुड़ने में सहायक सिद्ध होगी।