Prayagraj News: प्रयागराज की एमपी एमएलए कोर्ट ने कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर को नोटिस जारी किया है। ओम प्रकाश राजभर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि सपा के समय यूपीपीएससी भर्ती में 86 में से 56 एसडीएम यादव जाति के थे। सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल की तरफ से दाखिल परिवाद पर यह नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।
गलत जानकारी देने का आरोप
श्याम लाल पाल ने ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ मानहानि और गलत जानकारी देने का प्रयागराज के एमपी एमएलए कोर्ट में यह परिवाद दाखिल किया है। ओम प्रकाश राजभर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि सपा के समय यूपीपीएससी भर्ती में 86 में से 56 एसडीएम यादव जाति के थे। समाजवादी पार्टी की तरफ से 14 फरवरी को लीगल नोटिस भेज कर अपना बयान वापस लेने को कहा गया था। बयान वापस न लेने पर सपा के प्रदेश अध्यक्ष ने अधिवक्ता विनीत विक्रम और मनीष खन्ना के जरिए परिवाद किया दाखिल।
क्या है पूरा मामला
दाखिल परिवाद के मुताबिक, ओम प्रकाश राजभर ने 28 दिसंबर 2025 को बलिया जिले में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल (2012–2017) में यूपीपीएससी के जरिए चयनित 86 एसडीएम में से 56 यादव जाति से थे। इस बयान को समाजवादी पार्टी ने पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और तथ्यों के विपरीत बताया है। सपा का आरोप है कि मंत्री के इस बयान से न केवल पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है, बल्कि एक विशेष समुदाय को भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार से जोड़ने की कोशिश की गई है।
लीगल नोटिस के बाद कोर्ट का कड़ा रुख
समाजवादी पार्टी की ओर से 14 फरवरी को ओम प्रकाश राजभर को लीगल नोटिस भेजकर सार्वजनिक रूप से बयान वापस लेने और माफी की मांग की गई थी। जब मंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया, तो श्याम लाल पाल ने अपने अधिवक्ता विनीत विक्रम और मनीष खन्ना के माध्यम से प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट में परिवाद दाखिल किया। कोर्ट ने परिवाद पर संज्ञान लेते हुए ओम प्रकाश राजभर को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।