TMC approaches Supreme Court: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के एसआईआर को लेकर विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। टीएमसी ने अदालत में दावा किया कि कई विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उन वोटों से कम था, जिन्हें SIR प्रक्रिया के दौरान हटाया गया। पार्टी का कहना है कि इससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को नई याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति दी है।
कम वोट अंतर वाली सीटों का उठाया मुद्दा
सुनवाई के दौरान टीएमसी नेता कल्यान बर्नजी ने अदालत को बताया कि एक विधानसभा क्षेत्र में उम्मीदवार केवल 862 वोटों से हारा, जबकि वहां 5 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे। पार्टी ने दावा किया कि कई सीटों पर ऐसी स्थिति देखने को मिली, जहां हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी विस्तृत जानकारी
मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने टीएमसी से कहा कि वह सभी जरूरी तथ्यों के साथ अलग इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन दाखिल करे। अदालत ने संकेत दिया कि यदि वोट हटाने और चुनाव नतीजों के बीच सीधा संबंध साबित होता है, तो मामले की न्यायिक जांच की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि लंबित अपीलों के जल्द निपटारे पर प्राथमिकता से विचार किया जाएगा।
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निर्वाचन आयोग ने जताई आपत्ति
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत में कहा कि इस तरह के मामलों का समाधान चुनाव याचिका के जरिए होना चाहिए। आयोग ने दलील दी कि चुनाव परिणामों को चुनौती देने के लिए कानूनी प्रक्रिया पहले से तय है। इस पर टीएमसी ने अदालत से स्पष्ट आदेश देने की मांग की कि SIR में वोट हटाना भी चुनाव याचिका का आधार माना जाए।
लंबित अपीलों पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि अपीलेट ट्रिब्यूनल में लाखों अपीलें लंबित हैं और मौजूदा गति से इन्हें निपटाने में कई वर्ष लग सकते हैं। अदालत ने कहा कि वह उचित आवेदन मिलने पर पूरे मामले की समीक्षा करेगी। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई तक इसे स्थगित कर दिया गया है।