Shivling Jalabhishek: सावन में भोलेनाथ की पूजा का खास महत्व होता है। इस महीने में सोमवार, प्रदोष और दूसरे शुभ अवसरों पर भक्त मंदिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। लेकिन जल चढ़ाते समय अक्सर यह सवाल सामने आता है कि शिवलिंग पर पानी तांबे के लोटे से चढ़ाना चाहिए या पीतल के? धार्मिक परंपराओं में तांबे और पीतल दोनों को पूजा के लिए शुभ माना गया है। हालांकि, शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए तांबे के पात्र को अधिक शुभ माना जाता है। मान्यता है कि तांबे के लोटे से जल चढ़ाने से भगवान शिव की पूजा का विशेष फल मिलता है और यह तरीका धार्मिक दृष्टि से भी काफी प्रचलित है।
तांबे के लोटे से जल चढ़ाना क्यों माना जाता है शुभ?
हिंदू धार्मिक परंपराओं में तांबे को पवित्र धातु माना गया है। इसे शुद्धता और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि पूजा-पाठ में तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है। मान्यता के अनुसार, तांबे के पात्र में रखा जल पूजा के लिए शुद्ध माना जाता है। सावन में इसी जल से भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा भी कई जगहों पर देखने को मिलती है। श्रद्धालु इसे भोलेनाथ के प्रति अपनी आस्था और समर्पण का हिस्सा मानते हैं।
जलाभिषेक करते समय इन बातों का रखें ध्यान
* अभिषेक के लिए हमेशा साफ और शुद्ध जल लें।
* जल अर्पित करते समय 'ॐ नमः शिवाय' का जाप कर सकते हैं।
* शिवलिंग पर पानी जल्दबाजी में डालने के बजाय धीरे-धीरे अर्पित करें।
* पूजा में इस्तेमाल होने वाला लोटा और अन्य सामान साफ होना चाहिए।
* जल के साथ भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल भी अर्पित किए जा सकते हैं।
क्या पीतल के लोटे से जल चढ़ा सकते हैं?
अगर आपके पास तांबे का पात्र नहीं है तो पीतल के लोटे से भी भगवान शिव का अभिषेक किया जा सकता है। धार्मिक परंपराओं में पीतल को भी पूजा के लिए पवित्र धातु माना गया है। इसलिए केवल तांबे का लोटा उपलब्ध न होने पर पूजा रोकने की जरूरत नहीं है। पंचामृत या दूध, घी और शहद आदि से बने मिश्रण को अर्पित करने के लिए धार्मिक परंपराओं में पीतल, कांसे या चांदी के पात्र को उपयुक्त माना जाता है।
स्टील और लोहे के बर्तन का क्या?
पूजा-पद्धति से जुड़ी कुछ मान्यताओं में भगवान शिव के अभिषेक के लिए लोहे और स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में पूजा के नियमों में अंतर हो सकता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।