मध्य प्रदेश में नौ बच्चों की मौत के बाद कफ सिरप विवाद गहराता जा रहा है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर कहा है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप या सर्दी-खांसी की दवाइयां न दी जाएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर मामलों में बच्चों की खांसी-ज़ुकाम बिना दवाइयों के ही ठीक हो जाती है। इस बीच, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने Coldrif कफ सिरप समेत कंपनी के अन्य प्रोडक्ट्स की बिक्री पर प्रदेशभर में प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है।
केंद्र की एडवाइजरी: छोटे बच्चों को न दें कफ सिरप
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने राज्यों को सलाह दी है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवाइयां नहीं दी जानी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों में खांसी-ज़ुकाम की गंभीर बीमारियां अक्सर स्वतः ही ठीक हो जाती हैं और दवा के बिना भी सामान्य रूप से नियंत्रित हो जाती हैं।
वृद्धों और छोटे बच्चों में सावधानी जरूरी
एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी कफ सिरप की अनुशंसा सामान्यत: नहीं की जाती। वहीं, वृद्ध लोगों के लिए इसका उपयोग केवल चिकित्सीय मूल्यांकन, निगरानी और तय खुराक के साथ ही होना चाहिए।
सीएम मोहन यादव का सख्त रुख
छिंदवाड़ा में नौ बच्चों की मौत के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने Coldrif कफ सिरप और कंपनी के अन्य उत्पादों की बिक्री पर पूरे प्रदेश में बैन लगाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना के जिम्मेदार लोगों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। राज्य सरकार ने फैक्ट्री और अन्य उत्पादों की गहन जांच के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
देशभर में जांच तेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब देशभर में 19 दवा निर्माण इकाइयों पर जांच शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों की कई टीमें प्रभावित इलाकों में जाकर बच्चों की मौत के असली कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर दवा निर्माण कंपनियों की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।