बुलंदशहर से एक ऐसी भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है जो हर किसी के दिल को छू जाएगी. ये कहानी है सौरभ और खुशबू की, जो मध्यप्रदेश के सीधी जिले के गांव गामनकला के रहने वाले हैं. दोनों ने प्यार किया, शादी की, लेकिन समाज और परिवार ने इस रिश्ते को मंजूर नहीं किया. विरोध इतना हुआ कि दोनों को गांव छोड़ना पड़ा. लेकिन अब, सावन के इस पावन महीने में सौरभ और खुशबू ने एक अनोखा फैसला भगवान शिव की कांवड़ उठाकर अपने गांव लौटने का लिया है. दोनों हरिद्वार से जल लेकर करीब 650 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर रहे हैं. इस यात्रा का मकसद समाज से माफी मांगना, विश्वास लौटाना और फिर से अपने गांव, अपने अपनों के दिल में जगह बनाना है.
रोजाना 20-22 किलोमीटर कर रहे सफर
इस जोड़े की यात्रा साधारण नहीं है. हर दिन वो करीब 20 से 22 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं. कांधे पर भगवा झंडा, हाथों में कांवड़ और मन में सिर्फ एक भावना अपनापन पाने की. शिवभक्त सौरभ बताते हैं हमने प्यार किया, गलती नहीं लेकिन अगर किसी की भावनाएं आहत हुईं तो शिवभक्ति के इस माध्यम से सबका दिल जीतना चाहते हैं. वहीं खुशबू की आंखों में आंसू और पैरों में छाले हैं, लेकिन हौसला अडिग है. वो कहती हैं हम कोई लड़ाई नहीं लड़ रहे, हम दिलों को जोड़ने निकले हैं. जब हम गांव छोड़कर निकले थे, तो बहुत अकेलापन था. अब लगता है शिव हमें रास्ता दिखा रहे हैं.
राहगीरों और श्रद्धालुओं का खींचा ध्यान!
इस अनोखी यात्रा ने राहगीरों और श्रद्धालुओं का भी ध्यान खींचा है. कई लोग इनके जज़्बे को देखकर साथ चलने लगे हैं, तो कई मदद कर रहे हैं. सौरभ और खुशबू की ये कांवड़ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, यह प्रेम, समर्पण और सामाजिक पुनःस्वीकार्यता की मिसाल बन चुकी है. अब सभी की निगाहें गामनकला गांव पर हैं – क्या समाज इन्हें फिर से अपना लेगा या नहीं ?